गिरंट बाजार। बी-पैक्स समितियों पर किसानों का पंजीकरण किया जा रहा है, जिससे उन्हें आसानी से खाद व बीज मिल सके। किंतु कुछ स्थानों पर किसानों से पंजीकरण के नाम पर अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं। इससे किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
किसानों को आसानी से खाद व अन्य कृषि कार्य से संबंधित उपयोगी वस्तुएं मिल सकें, इसके लिए ग्राम स्तर पर किसानों का पंजीकरण कराया जा रहा है। ऐसे में बी-समितियों पर जो किसान अपना पंजीकरण कराकर पासबुक बनवाएंगे, उन्हीं को खाद मिल सकेगी।
इसके साथ ही सदस्यों की संख्या के आधार पर ही समितियों को खाद का आवंटन भी किया जाएगा, किंतु जमुनहा क्षेत्र के कुछ किसानों का आरोप है कि उनसे पंजीकरण के नाम पर अधिक रुपये वसूले जा रहे हैं।
मांगे गए 500 रुपये
ग्राम मुर्तिहा निवासी जन्नन खां ने बताया कि खाद के लिए समिति पर सदस्य बनाने के लिए उनसे 500 रुपये की मांग की गई। रुपये न होने के कारण वह अपना पासबुक नहीं बनवा सके।
वसूले गए 500 रुपये
मुर्तिहा गांव निवासी जान मोहम्मद बताते हैं कि खाद के लिए वह पूरे दिन लाइन में लगे रहे, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल सकी। सदस्य बनाने के लिए उनसे 500 रुपये वसूले गए।
खाद के लिए लगा रहे गोदाम के चक्कर
मुर्तिहा गांव निवासी रहीशुद्दीन ने बताया कि पहले तो खाद देने के लिए सदस्य बनने का दबाव बनाया। वह जब 500 रुपये देकर सदस्य बन गए, तो भी खाद नहीं मिल रही है।
मुर्तिहा गांव निवासी शमसाद बताते हैं कि समिति का सदस्य बनने के लिए उनसे 500 रुपये ले लिए गए, किंतु अभी तक उन्हें न तो पासबुक दी गई और न ही खाद, ऐसे में खेती-बाड़ी के काम पिछड़ रहे हैं।
226 रुपये है शुल्क
समिति का सदस्य बनने के लिए किसानों को मात्र 226 रुपये ही देने हैं। इसके बाद यदि कोऑपरेटिव बैंक में खाता खुलवाते हैं तो उसे 105 रुपये तथा प्रति शेयर 100 रुपये देने हैं। यदि किसी ने किसानों से अधिक रुपये वसूले हैं तो उसे वसूली गई रकम का विवरण भी देना होगा। मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रेमचंद प्रजापति, एआर कोऑपरेटिव