गंध कुटी में प्रार्थना करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। थाईलैंड के अनुयायियों का 50 सदस्यीय दल सोमवार को बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में गंध कुटी पर पारंपरिक तरीके से पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि भले ही श्रीलंका, थाईलैंड, कोरिया, कंबोडिया व जापान में बौद्ध धर्म के कई चमचमाते मठ हों, लेकिन बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती के जेतवन विहार के प्रति बौद्ध धर्मावलंबियों की आस्था अद्वितीय है। यही कारण है कि श्रावस्ती में देश-दुनिया के बौद्ध मतावलंबी भगवान बुद्ध की तपोस्थली पर जरूर आना चाहते हैं।
सहेट-महेट के झुरमुटों के बीच ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक भग्नावशेष की छटा विदेशी मेहमानों को सम्मोहित करती है। श्रावस्ती की माटी पर शांति देने वाला बोधि वृक्ष, चिंतन शिविर, ध्यान, भक्ति और योग के अलावा यहां खड़े कोरिया, थाईलैंड, श्रीलंका, तिब्बत, चीन, जापान व कंबोडिया आदि देशों के चमचमाते मठ-मंदिर दुनिया भर से आने वाले पर्यटकों को शांति का संदेश देते हैं।