फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वक्फ बोर्ड के नाम से गिनी-चुनी तीन संपत्तियां

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावस्ती। 1986 में जारी गजट के अनुसार जिले में वक्फ बोर्ड की गिनी चुनी संपत्तियां ही दस्तावेजों में दर्ज हैं। जबकि अघोषित तौर पर सुन्नी व शिया बोर्ड के घेरे में एक हजार से अधिक संपत्तियां बताई जाती हैं। इसमें नए पुराने मदरसों के साथ ही कब्रिस्तान व मस्जिदों व ईदगाह की भूमि भी शामिल है। इनमें से अधिकांश वर्तमान में अवैध कब्जे में फंसी हैं। इस संबंध में जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी देवेंद्र कुमार ने बस इतना बताया कि जिले में केवल तीन संपत्तियां वक्फ की है। यहां ऐसा कोई भी मामला नहीं आया है जो अवैध कब्जे से संबंधित हो।
विज्ञापन

जिले में अरसा पहले भिनगा में दान में दी गई जमीन ही वक्फ के नाम पर पंजीकृत है। इसके बाद से जिले में वक्फ के नाम पर सीधे कोी भी जमीन या संपत्ति पंजीकृत नहीं हुई है। वक्फ की परिभाषा के अनुसार मुसलिम धर्म के धार्मिक कार्यों को संचालित करने वाली संस्थाओं चाहे वह सरकारी हो अथवा गैर सरकारी, सिर्फ वक्फ की श्रेणी में आती है। ऐसे में अघोषित तौर पर जिले में एक हजार से अधिक संपत्तियों के मौजूद होने की बात कही जा रही है। हालांकि सीधे तौर पर यह संपत्तियां वक्फ में पंजीकृत नहीं है, लेकिन वक्फ की श्रेणी में आती है।
संशोधित वक्फ एक्ट 1995 के अनुसार अगर वक्फ बोर्ड को लगता है कि कोई जमीन वक्फ की संपत्ति है तो यह साबित करने की जिम्मेदारी उसकी नहीं, बल्कि जमीन के असली मालिक की होती है कि वो बताए कि कैसे उसकी जमीन वक्फ की नहीं है। वक्फ एक्ट 1995 का आर्टिकल 40 कहता है कि यह जमीन किसकी है, यह वक्फ का सर्वेयर और वक्फ बोर्ड तय करेगा। ऐसे में वक्फ का निर्धारण तीन आधार पर होता है। इसके तहत अगर किसी ने अपनी संपत्ति वक्फ के नाम कर दी हो अथवा कोई मुसलमान या मुस्लिम संस्था जमीन की लंबे समय से इस्तेमाल कर रही हो या फिर सर्वे में जमीन का वक्फ की संपत्ति होना साबित हुआ हो।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें