जमुनहा (श्रावस्ती)। गन्ना, मेंथा व मक्का के खेत के बीच से पूर्वांचल में सरयू नहर परियोजना गुजरती है। अभी तक ट्रायल के बाद इस नहर में पानी नहीं था। लेकिन रविवार को सरयू मुख्य नहर में श्रावस्ती से पानी छोड़ा गया। यह पानी 6623 किलोमीटर का सफर तय करके अपने टेल तक जाएगा। इससे 29 लाख किसानों के साथ पशु पक्षियों, जंगली जानवरों की प्यास बुझेगी।
सरयू नहर सिंचाई परियोजना पांच नदियों का संगम कराती है। इससे घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा व राहिन नदी आपस में जुड़ती है। इससे 6200 गांव के 1.04 लाख हेक्टेअर भूमि की प्यास बुझनी थी। लेकिन अभी तक इसके माइनरों का निर्माण पूर्ण न होने के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके बावजूद रविवार को श्रावस्ती के राप्ती बैराज से सरयू मुख्य नहर में पानी छोड़ गया है। इसके लिए बैराज के छह गेटों को 40 से 50 सेंटी मीटर ऊपर उठाया गया। पानी छोड़े जाने का मुख्य उद्देश्य श्रावस्ती सहित बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, गोंडा, संतकबीर नगर, महराजगंज व गोरखपुर में इस नहर के किनारे किनारे बने तालाब व गड्ढों को भरना है। ताकि पशु पक्षी जंगली जानवर के साथ साथ आसपास के ग्रामीण अपने पंपिंग सेट के माध्यम से खेतों तक पानी को पहुंचा सके।
यदि देखा जाए तो अकेले श्रावस्ती में ही लगभग बारह किलोमीटर का क्षेत्र ऐसा है जो जंगल से घिरा हुआ है। ककरदरी व भिनगा रेंज का यह जंगल जंगली जानवरों से भरा पड़ा है। जंगली जानवरों के पेयजल के लिए यह नहर ही एक मात्र वृहद विकल्प है। इस परियोजना के आसपास तालाबों की संख्या काफी अधिक है। लेकिन कुछ बड़े तालाब हैं जिन्हें सूचीबद्ध किया गया है। श्रावस्ती में ऐसे करीब 478 तालाब हैं। जिनको इस मुख्य नहर में पानी छोड़ने से लाभ होगा।
ऐसे ही बलरामपुर में 56, सिद्धार्थनगर में करीब 108, बस्ती में 86, संतकबीर नगर में 72 तो महराजगंज व गोरखपुर में कुल मिलाकर 275 तालाब है। जो इस पानी से आच्छादित होंगे। अधिशाषी अभियंता सरयू नहर खंड छह अजय कुमार ने बताया कि सरयू मुख्य नहर में पानी छोड़ने का मुख्य उद्देश्य तालाब व पोखरों को भरना है। ताकि गर्मी में जीव जंतु इसका लाभ पा सके। कुछ स्थानों पर सब्जी किसान भी इस पानी का उपयोग कर रहे हैं।