श्रावस्ती। कछार के गांवों के लिए राप्ती कभी जीवन दायनी तो कभी मुसीबत का सबब बनती रही है। जमुनहा के लक्ष्मनपुर सेमरहनिया गांव में चार वर्ष पूर्व बाढ़ के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पुलिया का अब तक निर्माण नहीं कराया गया। इससे आगामी बरसात व बाढ़ को लेकर ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ने लगी है।
राप्ती नदी जिले के हरिहरपुररानी, गिलौला, जमुनहा व इकौना विकास क्षेत्र के गांवों को विभाजित करती है। बरसात के दिनों में नदी के रौद्र रूप धारण कर लेने पर इसकी कछार में बसे करीब 144 गांव प्रभावित होते हैं। जहां राप्ती अपना तांडव मचाती है। बाढ़ की विभीषिका के थमने के बाद भी इन गांवों में राप्ती की तबाही के निशान मौजूद रह जाते हैं। ऐसा ही जमुनहा विकास क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मनपुर सेमरहनिया में देखा जा सकता है। जहां वर्ष 2017 में आई बाढ़ के दौरान मुख्य मार्ग पर बनी पुलिया बह गई थी। जिसकी चार वर्ष बाद भी मरम्मत नहीं हो सकी। इस मार्ग से होकर करीब चौदह गांवों में रहने वाले करीब पचास हजार लोगों का नियमित आना जाना रहता है। नासिरगंज जोगिया मुख्य मार्ग पर पुलिया निर्माण न होने से इस पर पड़ने वाले पोंदली, पोंदला, सेमरहनिया, लक्ष्मनपुर, जोगिया, सुखरामपुरवा, जमशेदपुर, धोबिहा, बाबूपुरवा, संगमपुरवा आदि गांव के ग्रामीणों को आठ किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा है। पुलिया न बनने से क्षेत्रवासियों में आक्रोश पनप रहा है।