कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध पूर्णिमा पर बुधवार को महाप्रजापति गौतमी भिक्षुणी प्रशिक्षण केंद्र श्रावस्ती में बुद्ध जयंती मनाई गई। इस दौरान शोभायात्रा भी निकाली गई। बौद्ध भिक्षु देवेंद्र की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से की गई। बौद्ध भिक्षु देवेंद्र ने कहा कि तथागत भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधि) और महापरिनिर्वाण यह तीनों ही वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे। इस दिन भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति भी हुई थी। बौद्ध धर्म को मानने वाले विश्व में 180 करोड़ से अधिक लोग है तथा इसे धूमधाम से मनाते हैं। भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में 24 वर्षावास बिताए, इसलिए श्रावस्ती का कण कण पूज्यनीय है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध करुणा व मैत्री के जनक थे। जिन्होंने विश्व को शांति का संदेश दिया। यह त्यौहार भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, पाकिस्तान तथा विश्व के कई देशों में मनाया जाता है। बिहार स्थित बोधगया नामक स्थान हिंदू व बौद्ध धर्मावलंबियों का पवित्र तीर्थ स्थान हैं। गृहत्याग के पश्चात सिद्धार्थ सत्य की खोज के लिए सात वर्षों तक वन में भटकते रहे। यहां उन्होंने कठोर तप किया। वैशाख पूर्णिमा के दिन बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में स्थित है। इस विहार का महत्व बुद्ध के महापरिनिर्वाण से है। इस मंदिर का स्थापत्य अजंता की गुफाओं से प्रेरित है। इस विहार में 6.1 मीटर लंबी भगवान बुद्ध की लेटी हुई (भू स्पर्श मुद्रा) मूर्ति है, जो लाल बलुई मिट्टी की बनी है। विहार के पूर्व हिस्से में एक स्तूप है, यहां पर भगवान बुद्ध का अंतिम संस्कार किया गया था। मौके पर भिक्षुणी मेघा थेरी, विजय बौध, अशोक कुमार बौद्ध, संतोष कुमार बौद्ध आदि उपासक मौजूद रहे।