तुलसीपुर। तराई में बदहाल सड़कें राहगीरों के लिए मुसीबत बनी हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर फोरलेन मार्ग तक जगह-जगह गड्ढे हैं। सबसे खराब स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की है। गड्ढों के कारण वाहन खराब होने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। सड़क से गिट्टियां गायब हैं और हल्की बारिश में कीचड़ व जलभराव से आवागमन मुश्किल हो जाता है। बिखरी बजड़ी से आए दिन राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
फोरलेन पर गड्ढे और झाड़ियां बढ़ा रहीं हादसे का खतरा
जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले बहराइच-भिनगा फोरलेन पर भी जगह-जगह गड्ढे हैं। भंगहा के पास सबसे ज्यादा गड्ढे बने हैं। सड़क किनारे उगी झाड़ियां भी परेशानी बढ़ा रही हैं। अचानक गड्ढा सामने आने से तेज रफ्तार दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर हादसे का शिकार हो रहे हैं। राहगीर भरत लाल, सूरज सोनकर और प्रभाकर मिश्रा ने बताया कि गड्ढों की मरम्मत के लिए डीएम से मांग की गई है।
तीन माह बाद भी सड़क अधूरी, रोड़ा बना खतरा
जमुनहा विकासखंड में जमुनहा गांव से चौलिका कुट्टी होते हुए बनगई चौराहा जाने वाली सड़क का निर्माण करीब तीन माह पहले पूरा होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद जमुनहा गांव और बनगई चौराहे के पास करीब 50-50 मीटर हिस्सा अधूरा है। यहां ईंट और रोड़ा बिखरा पड़ा है। ग्रामीण अवधराम, कृपाराम और सुरेंद्र नाथ का आरोप है कि कागजों में निर्माण पूरा दिखाकर सड़क अधूरी छोड़ दी गई है। इससे राहगीरों को परेशानी हो रही है।
सीएचसी जाने वाला मार्ग गड्ढों में तब्दील
जमुनहा-बहराइच मार्ग स्थित पटना से सीएचसी मल्हीपुर जाने वाली सड़क गड्ढों में तब्दील है। जगह-जगह गिट्टियां बिखरी हैं। बारिश में गड्ढों में पानी भरने और कीचड़ होने से मरीजों व तीमारदारों को परेशानी होती है। यह मार्ग दो दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ता है। ग्रामीण राजेश कुमार और सतीश पाठक ने बताया कि मरम्मत के लिए कई बार मांग की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
टूटी सड़क
टूटी सड़क