श्रावस्ती। नेपाल के पहाड़ों सहित तराई में रही बरसात के कारण राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सोमवार सुबह राप्ती खतरे के निशान से करीब पंद्रह सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गई, जिससे बाढ़ का पानी खेतों को जलमग्न करता हुआ गांवों की ओर बढ़ने लगा। इसे देख कछारवासियों की धड़कनें तेज हो गईं। हालांकि, दोपहर बाद राप्ती नदी का जलस्तर दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घटने लगा, जिससे कछारवासी के गांवों में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया। वहीं राप्ती नदी की लहरें घटते व बढ़ते जलस्तर के कारण अपने किनारों पर बसें गांव व खेतों में तेजी से कटान कर रही है। अशरफ नलगर गांव में नदी अपने किनारे पर बसे सात घरों को अपनी आगोश में ले लिया।
इसके साथ ही नदी किनारे स्थित करीब 110 बीघा कृषि भूमि फसल सहित नदी की धारा में विलीन हो गई, जिसे देख किसान परेशान है। इसके साथ ही जमुनहा क्षेत्र में भकला नाला का जलस्तर भी बढ़ गया है। ऐसे में जहां कई गांवों में रहने वाले लोगों के सामने आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं भकला नाले का जलस्तर बढ़ने के कारण आसपास खेतों में लगी मक्का आदि की फसलें भी जलमग्न हो गई है, जिनके खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
सुबह छह बजे राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर 127.55 मीटर था। आठ बजे 127.75 मीटर पहुंच गया। नौ बजे राप्ती नदी खतरे के निशान से पंद्रह सेंटीमीटर ऊपर 127.85 मीटर पहुंच गई। यह स्थिति दस बजे तक बनी रही। इसी के बाद राप्ती नदी दोपहर बारह बजे 127.80 मीटर पहुंच गई।
हरिहरपुररानी क्षेत्र के अशरफ नगर गांव में राप्ती नदी विगत कई दिनों से कटान कर रही है। इसके चलते अब तक लड्डन, कुतुब, जिब्रील, अशफाक, मेराज, इब्राहिम खां व यासीन खां का घर नदी में समा चुके हैं। इनमें से कई लोगों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास भी मिला हुआ था। ऐसे ही इकौना के मध्यनगर में भी राप्ती नदी कटान कर रही है। इस वजह से अब तक कई लोगों ने अपना घर स्वयं ही तोड़ दिया है। जो भी मलबा मिला उसे लेकर सुरक्षित स्थान की ओर निकल चुके हैं।
हरिहरपुररानी के ग्राम पंचायत अशरफ नगर में गुलाम रसूल पुत्र अब्दुल समद खां का 2 बीघा,
अलादीन पुत्र अब्दुल समद का 2 बीघा, हाजी अकबर का 2 बीघा, कमरुला बनो पत्नी अब्दुल हकीम खा का 10 बीघा, अब्बास खा पुत्र जमीदार खा का 10 बीघा, रफीक अहमद पुत्र आहद खां का 5 बीघा, हनीफ पुत्र आहद का 5 बीघा, अब्दुल हकीम का 5 बीघा, अरमान पुत्र अब्बास का 4 बीघा, छोटू अली पुत्र बन्दे अली का 3 बीघा, मोहम्मद अली पुत्र नजीब अली का 5 बीघा, हैंदर पुत्र नजीब का 5 बीघा, जोखु अली पुत्र मुस्लिम का 4 बीघा, पेरू अली पुत्र मुस्लिम का 4 बीघा जमीन राप्ती नदी में कट कर समा चुकी है। वहीं इकौना के रमनगरा में अब तक 55 बीघा खेत कट कर नदी में समाहित हो चुकी है।