श्रावस्ती। बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा बेटियों का जन्म सिद्ध अधिकार है। जो उन्हें हर स्थिति में मिलनी चाहिए। बेटियों के साथ किसी भी क्षेत्र में भेदभाव न किया जाए। वह भी प्यार व दुलार की हकदार हैं। जिससे उन्हें वंचित करना कानून व समाज किसी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकता। यह बातें अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत किसान इंटर कॉलेज सुविखा में आयोजित संवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहीं।
वक्ताओं ने कहा कि आज बेटियां बेटों का हक अदा कर रही हैं। बेटा व बेटी में कदापि भेद न करें। कोई भी ऐसा कार्य नहीं है, जो बेटियां नहीं कर सकती। आज बेटियां सीमा सुरक्षा से लेकर ट्रेन व प्लेन चला ही रही हैं। पिता के अर्थी को कंधा देकर वह अब यह भ्रम भी तोड़ चुकी हैं कि कुल को आगे बढ़ाने के लिए बेटा जरूरी है। ऐसे में हर किसी को माता व पिता होने का फर्ज निभाना चाहिए। बेटियों को उचित प्यार व शिक्षा देकर उन्हें आत्मरक्षा के लिए तैयार करें। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के शिक्षक रामसूरत शुक्ला व अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य रामराखन तिवारी ने की।
बेटियों ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन हो माता पिता का नाम रोशन किया। इस बार गणतंत्र दिवस की परेड का नेतृत्व भी बेटी ही करेगी। ऐसे में बेटियों को लेकर माता पिता को चाहिए कि वह अपने मन में कोई भ्रम न रहने दें। बेटा व बेटी दोनों समान हैं। इसलिए दोनों को समान प्यार, सम्मान, शिक्षा व संस्कार दें। - डॉ. रोहित कुमार सीएचसी अधीक्षक
सरकार बेटियों को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रयत्नशील है। वहीं अमर उजाला ने भी बेटियों को सशक्त, शिक्षित व स्वावलंबी बनाने की मुहिम छेड़ रखी है। इससे जुड़ कर हम सभी को बेटियों को शिक्षित व आत्मनिर्भर बनाने के लिए आगे आना होगा। जिससे बेटियों को उनका अधिकार मिल सकेगा। - राम राखन तिवारी, प्रधानाचार्य
अमर उजाला ने देश व समाज में बदलाव लाने के लिए हर संभव प्रयास किया। इसका असर भी लोगों पर हुआ है। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो पहल शुरू हुई है उससे बदलाव की हवा चली है। लोगों को चाहिए कि वह अपराजिता मुहिम से जुड़ कर इसको आगे बढ़ाने में सहयोगी बनें। - रामसूरत शुक्ला शिक्षक
इंसान की सबसे बड़ी दौलत शिक्षा व बेहतर स्वास्थ्य है। इसे कोई दूसरा चुरा नहीं सकता। जिसके पास शिक्षा व स्वास्थ्य है उसे किसी के आगे हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं रहती। बालिकाओं को चाहिए कि वह अपनी शिक्षा के साथ साथ स्वास्थ्य का भी विशेष ख्याल रखें। - लक्ष्मी विश्वकर्मा
कुछ सामाजिक कुरीतियां आज भी बेटियों के विकास की राह में रोड़े अटका रही है। इसे तोड़ने की आवश्यकता है। बेटियां अब अबला नहीं रही। वह अपनी तरफ उठने वाली उंगली को मोड़ना सीख चुकी हैं। हम पढ़ लिखकर अपने पैरों पर खड़े होकर समाज में बदलाव लाएंगे। - मंजू गुप्ता
बेटियों की सुरक्षा को लेकर माता पिता के दिल में कहीं न कहीं भय बना रहता है। इसे दूर करने की आवश्यकता है। यह तभी संभव होगा जब बेटियां स्वस्थ हों। ताकि वह बेहतर शिक्षा के साथ ही आत्मरक्षा का गुर भी सीख सकें। जिससे माता पिता के मन से भय निकल सके। - वंदना मिश्रा
बेटियों व महिलाओं को आज भी घरों से बाहर निकलने पर लोगों की छींटाकशी का शिकार होना पड़ता है। इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए हमें डट कर मुकाबला करना चाहिए। ताकि ऐसे लोगों को सबक सिखाया जा सके। - लक्ष्मी मिश्रा
विद्यालयों में शिक्षा के साथ ही खेल व व्यायाम को भी बढ़ावा मिले। साथ ही साथ छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए जूडो कराटे आदि का भी प्रशिक्षण दिलाया जाए। बेटियों को चाहिए कि वह स्काउट गाइड व एनसीसी से जुड़ कर लाठी डंडा व अस्त्र शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण लें। - सना
शिक्षा सफलता की कुंजी है। सफलता तभी मिलेगी जब हम मानसिक रूप से पूरी तरह सफलता के लिए प्रयत्न करें। इसके लिए जरूरी है कि हमारे साथ किसी प्रकार का भेद भाव न हो। बेटियों को बेटों के समान आजादी मिले तो बेटियां भी आसमान छू सकती हैं। - महविस बानो
विद्यालयों में प्रतिमाह बेटियों के स्वास्थ्य प्रशिक्षण का एक कार्यक्रम होना चाहिए। साथ उन्हें सामाजिक सरोकार में भी शामिल होने का मौका देना चाहिए। अमर उजाला ने जो मुहिम छेड़ी है। उससे जुड़कर इस अभियान को और आगे बढ़ाने के लिए हमें संकल्प लेना होगा। - अनम बानो
जिस तरह अमर उजाला सामाजिक सरोकार से छात्राओं को जोड़ने के लिए समय समय पर मुहिम चला रहा है, उससे निश्चित ही समाज में बदलाव आएगा। अमर उजाला ने बेटियों को अपराजिता बनाने का जो बीड़ा उठाया है, उसे पूरा करने के लिए हमें संकल्प लेना होगा। - कोमल पांडे
बेटियां बोझ नहीं हैं। इसलिए बेटियों को खुला आसमान दें। जिससे वह अपनी इच्छाओं को उड़ान देकर माता पिता का सपना पूरा कर सके। गुरुजनों को भी चाहिए कि वह बेटियों को संस्कारवान, शिक्षित व सशक्त तथा स्वावलंबी बनाने के लिए आगे आएं। - रूचि गुप्ता
बेटियों की बेहतर शिक्षा के लिए आवश्यक है कि हम शारीरिक व मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ रहें। हमारे आसपास का माहौल अच्छा हो। समाज बेटियाें के सशक्तिकरण के लिए संकल्पवान हों। यह तभी संभव है जब लोग बेटियों को बेटे से कम न मानें। - प्रिया मिश्रा