जमुनहा के ककरदरी गांव में सीमा स्तंभ को कटान से बचाने के लिए किए गए इंतजाम।
जमुनहा (श्रावस्ती)। नेपाल से जिले में प्रवेश करने वाली राप्ती नदी कभी स्थिर नहीं रही है। वह हर बार कटान कर एक नया रास्ता बनाने का प्रयास करती है। राप्ती की इसी प्रवृत्ति के कारण भारत-नेपाल की सीमा निर्धारित करने वाले स्तंभ का वजूद भी खतरे में है। यदि समय रहते इसे बचाने का प्रयास न हुआ तो राप्ती नदी इसे अपनी धारा में मिला सकती है।
तराई सहित नेपाल के पहाड़ों पर आए दिन होने वाली बारिश के कारण बुधवार को राप्ती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा था। जो सामान्य दिनों की अपेक्षा 30 सेंटीमीटर अधिक बढ़ गया था। हालांकि अब यह अपने सामान्यता स्तर पर पहुंच चुका है। बरसात में नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर उच्चतम स्तर तक पहुंच जाता है। ऐसे में नदी अपने बढ़ते व घटते जलस्तर के कारण अपने किनारों पर तेज कटान भी करती है। नदी अपनी इस प्रवृत्ति के कारण विगत वर्ष इंडो-नेपाल सीमा के पिलर संख्या 12/09/640 के करीब पहुंच गई थी। ऐसे में यदि समय रहते कोई ठोस कदम न उठाए गए तो बरसात में नदी की उग्र लहरें कटान करती हुई सीमा स्तंभ को अपनी धारा में विलीन कर सकती हैं। हालांकि इसे बचाने के लिए बोरी में ईंट भरकर सीमा स्तंभ के निकट नदी के तट पर लगाया जा रहा है, ताकि नदी यहां कटान न कर सके।