श्रावस्ती। जमुनहा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत कथरामाफी व उसके मजरों में राप्ती का कटान जारी है, हजारों की आबादी दहशत के साये में जी रही है। नदी खेतों व बागों को काटते हुए तेजी से कथरामाफी की ओर से बढ़ रही है। अब तक 250 बीघा से अधिक कृषि योग्य जमीन नदी में समा गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कटान शुरू होते ही एसडीएम को प्रार्थना पत्र देकर घाटेपुर व सलारूपुरवा में ठोकर बनाने की मांग की गई थी, लेकिन कटान को लेकर जिम्मेदार उदासीन बने हुए हैं। नदी कटान करते हुए गांव के एकदम करीब पहुंच गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि ऐसे ही कटान जारी रहा, तो कुछ दिन में ही कथरामाफी, सलारूपुरवा व घाटेपुर का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
नहीं हो रही कोई सुनवाई
घाटेपुर निवासी रामफेरन ने बताया कि सैकड़ों बीघा खेत व बाग को नदी ने काट कर धारा में समाहित कर लिया है। हम लोग अधिकारियों से खेतों व गांव को बचाने के लिए फरियाद लगा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
बीते साल घर बहा, अब कट रहा है खेत
सलारुपुरवा निवासी घुमना ने बताया कि बीते साल नदी घर काट कर बहा ले गई थी, इस बार खेत काट रही है। सड़क किनारे घर बनाकर जीवनयापन कर रहे हैं। अब खेत ही नहीं बचेगा, तो परिवार को खाने के भी लाले पड़ जाएंगे।
कट गया धान लगा तीन बीघा खेत
सलारूपुरवा निवासी राम तिवारी ने बताया कि उनके पास जीवनयापन के लिए सिर्फ तीन बीघा खेत ही था, जो नदी में समा गया। अब कुछ नहीं बचा, मजदूरी करना ही आखिरी विकल्प है। तहसील प्रशासन की ओर से मदद छोड़िए, कोई हाल पूछने तक नहीं आया।
तहसील गए थे, लेकिन मदद नहीं मिली
घाटेपुर निवासी जगतराम ने बताया कि हम किसानों का खेत राप्ती में तेजी से समाहित हो रहा है, लेकिन तहसील में बैठे हुक्मरानाें को कोई फर्क नहीं पड़ रहा। मदद के लिए तहसील गए थे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।