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राप्ती योजक नहर पूरी, जल्द होगा ट्रायल

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श्रावस्ती। राप्ती योजक नहर का कार्य पूरा हो चुका है। अब यह परियोजना सरयू योजक राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ गई है। इसके बाद श्रावस्ती में लगभग 48500 हेक्टेअर भूमि सिंचित हो सकेगी। वहीं नौ अन्य जिलों को भी आगे इसका फायदा होगा। इसी माह इसका ट्रायल भी होगा।
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श्रावस्ती का अधिकांश भाग असिंचित है। खास तौर से सिरसिया जैसे तराई क्षेत्र में सिंचाई का एक मात्र साधन छोटे नलकूप हैं। जबकि इसी क्षेत्र में राप्ती योजक (लिंक) नहर का निर्माण काफी दिनों से चल रहा था। राप्ती लिंक नहर जो सरयू व राप्ती को जोड़ती है। इसकी लंबाई लगभग 21.41 किलोमीटर है।
इस लिंक नहर का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जून में ही इसका ट्रायल होना है। लिंक नहर के सरयू योजक राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ने के बाद यदि सब कुछ ठीक रहा तो करीब 2.5 लाख हेक्टेअर खेतों को पानी मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसमें लगभग 48500 हेक्टेअर भूमि जिले की भी सिंचित हो जाएगी।
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सरयू परियोजना में वर्ष 1982-1983 से कार्य प्रारंभ हुआ। यह परियोजना कई बार पुनरीक्षित की जा चुकी है। परियोजना को वर्ष 2012-2013 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया। 10 फरवरी 2000 में इस परियोजना के तहत नहर का कार्य 9205 किलोमीटर, नाले का 9000 किमी एवं 3600 नलकूप निर्माण किये जाने का प्रावधान किया गया था।
वर्ष 2013 में इस परियोजना के तहत बस्ती में 299.83 किमी, संतकबीर नगर में 76-90 किमी, बहराइच में 219.94 किमी, गोरखपुर में 1976.09 किमी, बलरामपुर में 300.59 किमी, सिद्धार्थनगर में 905.51 किमी ड्रेन के निर्माण को प्रस्तावित किया गया था। इसमें सरयू परियोजना कमांड में श्रावस्ती, गोंडा की स्थिति का उल्लेख नहीं था।
ऐसी स्थिति में सरयू परियोजना के अंतर्गत 9000 किमी ड्रेन के बाद वर्ष 2013 में श्रावस्ती, गोंडा को इस परियोजना में शामिल किया गया। 2014 में इस परियोजना के तहत ड्रेन की लंबाई में वृद्धि की गई। श्रावस्ती में लिंक चैनल की लंबाई 21.4 किलोमीटर है।
सिरसिया के किसान रामकुमार बताते हैं कि जब नहरों का निर्माण हो रहा था तो किसानों ने सिंचाई सुविधा मिलने की आस में अपनी उपजाऊ जमीनें दी, लेकिन किसानों की यह परियोजना 41 साल तक अधर में लटकी रही। अब कुछ आस जगी है। किसान मुस्ताक अली बताते हैं कि कई वर्ष पहले श्रावस्ती में नहर बननी शुरू हुई थी।
इसका कई बार काम शुरू हुआ और बंद हो गया। अब कुछ हिस्सों में नहर का काम पूरा हुआ है तो विभाग उसका ट्रायल करने जा रहा है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो किसानों के लिए लाभकारी होगा। राम भरोसे बताते है कि नहर में सिंचाई के लिए पानी मिलता रहता तो छोटे किसान सब्जी की बेहतर खेती कर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं। यदि नगर में पानी आया तो क्षेत्र में परिवर्तन देखने को मिलेगा।
सरयू नहर खंड चार के अधिशासी अभियंता एसके वर्मा ने बताया कि सरयू नहर परियोजना नौ जिलों में फैली है। इस परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी राप्ती लिंक नहर है जो सरयू व राप्ती को आपस में जोड़ती है। इसका कार्य पूरा हो चुका है। जून में ही इसका ट्रायल शुरू हो जाएगा
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