श्रावस्ती/कटरा। तराई में 11 घंटे तक लगातार हुई बारिश से खेतों में भरे पानी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। खेतों में धान की फसल डूबने से भारी नुकसान की आशंका से किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं। शुक्रवार को बारिश थमने के बाद अधिकांश किसान खेतों से पानी निकालते व धान की फसल को ऊंचे स्थान पर सुरक्षित करते दिखे।
तराई में बृहस्पतिवार को हुई झमाझम बारिश ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है और मड़ाई के लिए खेत में पड़ी फसल उसमें डूब गई है। खड़ी फसल भी खेतों में गिरकर पानी में डूब गई है। इकौना प्रतिनिधि के बारिश ने इकौना देहात,अकबरपुर, लयबुड़वा सहित सैकड़ों गांवों के हजारों किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
पुरैनिया निवासी किसान अनोखी लाल गुप्ता ने बताया कि उनका 10 बीघा धान खेत में मड़ाई के लिए कटा पड़ा था, जो बारिश में भीग गया है। उन्होंने बताया कि भारी नुकसान होगा और उपज आधी रह जाएगी। ऐसे में परिवार पालना भी मुश्किल होगा।
खरगौरा बस्ती निवासी मोतीलाल साहू ने बताया कि उनकी चार बीघा धान की फसल पानी में डूबी पड़ी है और सड़ने लगी है। मेंहीलाल प्रजापति ने बताया कि उनका दो बीघा धान बारिश की भेंट चढ़ गया है। किसान राधेश्याम यादव ने बताया कि दो दिन पहले ही परिवार के साथ फसल काटी थी, सब चौपट हो गई।
बाल्टी से निकाल रहे पानी, फसल ऊंचे स्थान पर पहुंचा रहे
वीरपुर प्रतिनिधि के मुताबिक में शुक्रवार को भी आसमान में छाए काले बादल किसानों की चिंता बढ़ाते रहे। सुबह से ही किसान मौसम की मार से होने वाली क्षति को कम करने के प्रयास में जुट गए। शुक्रवार को वीरपुर के महदेइया निवासी किसान बाबादीन परिवार के साथ खेत में कटी पड़ी धान की फसल को पानी से निकालकर ऊंचे स्थान पर रखते दिखे।
किसान सत्य नारायण का 20 बीघा, राज बहादुर मिश्रा का 35 बीघा, संदीप बाबा का 15 बीघा धान पानी से घिर गया है। वे खेत से पानी निकालने के साथ ही धान की फसल को सुरक्षित स्थान पर ले जाते दिखे।
जमुनहा प्रतिनिधि के मुताबिक चोंगोई निवासी शमशाद अली, ओमकार वर्मा ने बताया कि खेत में लगी 20 बीघा से अधिक धान की फसल खेत में पसर गई है। सभी किसानों ने 20 प्रतिशत तक नुकसान का आकलन किया है।