गिरंट क्षेत्र में गिरी धान की फसल।
श्रावस्ती। तराई में करीब एक पखवाड़े बाद बुधवार रात फिर बारिश का सिलसिला शुरू हुआ। तेज बारिश नहीं हुई, लेकिन फसलों के लिए यह संजीवनी साबित हुई। धान के साथ गन्ना, मक्का, मेंथा और अरहर की फसलों को फायदा पहुंचा है। वहीं, 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं से कई स्थानों पर फसलें गिर गईं। मौसम इसी तरह बना रहा तो नुकसान बढ़ सकता है। उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को तापमान में गिरावट से राहत मिली। आसमान में काले बादल छाने के बाद बारिश की फुहारें शुरू हुईं। न्यूनतम तापमान 23 और अधिकतम 29 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सिंचाई की तैयारी कर रहे किसानों को बारिश से राहत मिली।
धान गिरने से नुकसान की आशंका
अड़राई निवासी अनोखे लाल यादव ने बताया कि बारिश फसलों के लिए मुफीद है। काशीपुरवा निवासी मनीष कुमार यादव ने कहा कि धान में बालियां निकल रही हैं। तेज हवा से फसल गिरने की आशंका है। सुजानडीह निवासी राम निवास ने बताया कि बारिश से धान, गन्ना, मक्का, मेंथा व अरहर को फायदा हुआ है।
गंधी कीट दिखे तो करें उपचार
जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता ने बताया कि सितंबर में औसत वर्षा 1046 मिलीमीटर के सापेक्ष अब तक 679.9 मिलीमीटर हुई है। पिछले वर्ष यह आंकड़ा 821.5 मिलीमीटर था। उन्होंने किसानों को खेत में पानी भरने पर निकासी करने की सलाह दी। गंधी कीट लगने पर कृषि रक्षा इकाइयों से कीटनाशक लेकर तत्काल छिड़काव करें।