कटरा (श्रावस्ती)। इकौना डायट में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद तथा इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसायटी ओर से शिक्षकों को कठपुतलियों की उपयोगिता का प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। सोमवार से शुरू हुए इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में शिक्षकों को कठपुतली की उपयोगिता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के डाॅ. अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि कठपुतलियां सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि जनसंचार का सशक्त माध्यम हैं। डाॅ. अनूप चतुर्वेदी ने बताया कि वेक्टर जनित रोग जैसे मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, एंसेफलाइटिस व स्क्रब टायफस आदि से बचाव के लिए लोक माध्यमों से विज्ञान व प्रौद्योगिकी संचार तथा गांव आउटरीच कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा सकता है। इस दौरान प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों को पटकथा लेखन, उसका नाट्य रूपांतरण, कठपुतली निर्माण और उसके संचालन का प्रशिक्षण दिया गया। विज्ञान संचारक डॉ. वीपी सिंह ने कहा कि नाटक के संवाद रोचक होने चाहिए। कठपुतली कलाकार इश्तियाक अली व राजेंद्र त्रिवेदी ने रद्दी कागज भिगोकर कठपुतली निर्माण का आरंभिक चरण बताया। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया आदि वेक्टर जनित रोगों पर पटकथा लिखकर लाने को कहा गया। जिसे बाद में पुतुल नाटक के रूप में परिवर्तित किया जाएगा।