श्रावस्ती। तराई में कोहरे का प्रकोप शुरू हो चुका है। इसके साथ ही आगामी दिनों कोहरा के साथ पाला भी गिर सकता है। ऐसे में आलू की अगैती व पिछैती प्रजाति की फसल में झुलसा सहित अन्य रोगों का खतरा उत्पन्न हो सकता है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को इससे बचने के उपाय सुझाए हैं।
जिला उद्यान अधिकारी दिनेश चौधरी ने बताया कि जिले में आलू के अच्छे उत्पादन के लिए कीट एवं रोगों का उचित समय पर नियंत्रण जरूरी है। आलू की अगैती व पिछैती फसल झुलसा रोग के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती है।
प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदली युक्त बूंदाबांदी एवं नम वातावरण में अगैती व पिछैती आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से फैलता है। इससे फसल को भारी क्षति पहुंचती है। ऐसी परिस्थितियों में आलू उत्पादकों को सलाह दी जाती है कि आलू की अच्छी पैदावार के लिए रक्षात्मक दृष्टिकोण अपनाएं।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि अगैती झुलसा रोग का प्रकोप निचली पत्तियों से प्रारंभ होता है जिसके फलस्वरूप गहरे भूरे/काले रंग के कुंडलाकार छल्लेनुमा धब्बे बनते हैं जो बाद में बीच में सूख कर टूट जाते हैं। प्रभावित निचली पत्तियां सूख कर गिर जाती हैं। इन धब्बों के बीच में कुंडलाकार आकृति दिखाई देती है।
पिछैती झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल को विशेष क्षति होती है। इस रोग से पत्तियां सिरे से झुलसने लगती है जो तेजी से फैलती हैं। दो से चार दिन के अंदर ही पूरी फसल नष्ट हो जाती है। बदली युक्त 90 प्रतिशत से अधिक आर्द्रता वाले वातावरण एवं कम तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप तेजी से होता है।