जिला चिकित्सालय में बच्चे का इलाज करते चिकित्सक। - संवाद
श्रावस्ती। ठंड का मौसम बच्चों के लिए समस्या का सबब बनता जा रहा है। जिला चिकित्सालय में निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सक उपचार के साथ ही बच्चों के तीमारदारों को निमोनिया से बचाव के लिए भी सचेत करते दिख रहे हैं।
तराई में धूप तो निकल रही है, लेकिन सुबह-शाम ठंड पड़ने से मौसम जनित बीमारियां बढ़ने लगी हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा की ओपीडी में बृहस्पतिवार को 745 मरीज पहुंचे। बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में भी मरीजों की भीड़ लगी दिखी। इनमें सर्दी-बुखार के साथ ही निमोनिया के मरीज अधिक रहे।
चिकित्सक डॉ. ध्रुव मिश्रा ने बताया कि ठंड के मौसम में बच्चे अक्सर निमोनिया की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में परिजनों को चाहिए कि बच्चों को सर्दी-खांसी के मरीजों से दूर रखें। साथ ही उन्हें गर्म कपड़े पहनाकर रखें। ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन कतई न करने दें। स्तनपान कराने वाली मां को भी ठंड से बचने की जरूरत है।
चिकित्सक डॉ. गोविंद शुक्ला ने बताया कि बच्चों को न्यूमोकोकल और इन्फ्लूएंजा के टीके अवश्य लगवाएं। इससे उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होगा। बच्चों को छह माह तक मां का दूध ही पिलाएं। साथ ही छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को पौष्टिक आहार खिलाएं।
चिकित्सक ने बताया कि एनआईसीयू में निमोनिया से पीड़ित तीन बच्चों को भर्ती किया गया है। साथ ही ओपीडी में भी निमोनिया के मरीज आ रहे हैं।