श्रावस्ती/सिरसिया। पशुपालन विभाग की ओर से 22 जुलाई से खुरपका व मुंहपका (एफएमडी) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। तभी से पैरावेट भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। ऐसे में मात्र 11 चिकित्सक व तीन पशुधन प्रसार अधिकारियों के भरोसे टीकाकरण अभियान जिले में रेंग रहा है। समय पर टीकाकरण न होने से मवेशियों को खुरपका व मुंहपका जैसे रोग होने की आशंका भी बढ़ गई है। बुधवार को अमर उजाला की ओर से की गई पड़ताल में पता चला कि कई गांव ऐसे हैं, जहां पर अब तक न तो चिकित्सक पहुंचे हैं और न ही विभाग का कोई कर्मी।
बिना पैसे के बात भी नहीं करते चिकित्सक
ग्राम बनगाई निवासी प्रेमनरायण पांडेय ने बताया कि लगभग तीन वर्ष बीतने को हैं कोई चिकित्सक मवेशियों के टीकाकरण के लिए गांव में नहीं पहुंचा है। यदि कभी मवेशियों के इलाज के लिए बुलाया जाता है तो बिना पैसा लिए वह कुछ नहीं करते हैं।
मवेशियों को नहीं लगा कोई टीका
ग्राम भितुहुरिया निवासी रोहित कुमार वर्मा ने बताया कि मवेशियों को अब तक कोई भी टीका नहीं लगा है। ऐसे में उन्हें बारिश के दिनों में खुरपका व मुंहपका सहित अन्य रोगों के होने का खतरा बना हुआ है।
गलसुआ बीमारी का है खतरा
ग्राम डोमाई निवासी शेष राम यादव ने बताया कि दो वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन कोई भी कर्मी मवेशियों का टीकाकरण करने नहीं पहुंचा है। ऐसे में बारिश के दिनों में मवेशियों को गलसुआ बीमारी होने का खतरा अधिक रहता है। इस बीमारी से मवेशियों की मौत तक हो जाती है।
कभी नहीं हुआ मवेशियों का टीकाकरण
ग्राम बुटहर निवासी गिरीश चंद्र वर्मा ने बताया कि गांव में कभी कोई टीकाकरण टीम नहीं पहुंची है। ऐसे में मवेशियों की सेहत पर खतरा मंडरा रहा है। यदि मवेशियों का टीकाकरण हो जाता तो उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।
जिले में कुल दो लाख 11996 मवेशी हैं। इनके टीकाकरण के लिए 13 टीमें बनाई गई हैं। साथ ही ब्लॉकवार टीमों को लक्ष्य भी वितरित किया गया है। कर्मचारियों की कमी के चलते टीकाकरण अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है। अब तक मात्र 13.01 प्रतिशत ही टीकाकरण हो सका है। हालांकि सभी को निर्देश दिया गया है कि क्षेत्र में एक भी मवेशी टीकाकरण से अछूता न रहे।
- डॉ. सुनील कुमार सिंह, सीवीओ
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