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27 दिन में खरीदा लक्ष्य का 20 फीसदी धान

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श्रावस्ती। क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों की लंबी कतार है। इसके बाद भी क्रय केंद्रों पर खरीद की गति अभी भी धीमी बनी हुई। लगभग 27 दिन बीतने के बाद भी जिले में अब तक 20.57 प्रतिशत ही धान की खरीद हो पाई है। सबसे खराब स्थिति एनसीसीएफ के क्रय केंद्रों की है। जहां तीन हजार एमटी के सापेक्ष मात्र चार प्रतिशत ही किसानों से धान खरीदा गया। भुगतान की स्थिति भी चिंता जनक है। अब तक जिले में पचास फीसदी से भी कम का भुगतान हो पाया है।
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धान उत्पादित करने वाले किसानों की स्थिति जिले में ठीक नहीं है। सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों से समय पर धान की खरीद नहीं हो पा रही है। इस पर धन की जरूरत के चलते किसान बिचौलियों को अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। वहीं बिचौलिए व आढ़ती किसानों से 900 रुपये में धान खरीद रहे हैं। क्रय केंद्रों पर धान नहीं खरीदे जाने का आंकड़ा स्वयं क्रय एजेंसियां ही दे रही है। देखा जाए तो जिले में अब तक धान बेचने के लिए दस हजार 75 किसानों ने अपना पंजीकरण कराया था।
इसके सापेक्ष मात्र 1256 किसानों से ही अब तक धान की खरीद की गई। यह खरीद लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 20.57 प्रतिशत ही है। धान खरीद में ही नहीं बल्कि भुगतान में किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। अब तक 1256 किसानों से 7201.21 एमटी धान की खरीद की गई। इस पर किसानों का तेरह करोड़ 45 लाख 15 हजार रुपये बना, लेकिन इसके सापेक्ष अब तक मात्र छह करोड़ 65 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान हो पाया है। शेष किसान पैसे के लिए क्रय केंद्र का चक्कर लगा रहे हैं।
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केंद्रों पर अब तक इतना खरीदा गया धान
जिले में 37 धान क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें शासन की ओर से 35 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें खाद्य विभाग के पांच, एफसीआई का एक, एनसीसीएफ के दो व पीसीएफ के 29 क्रय केंद्र स्थापित किए गए है। खाद्य विभाग ने लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 16.38 प्रतिशत, पीसीएफ ने 24.84 प्रतिशत, एनसीसीएफ ने 4.03 एवं भारतीय खाद्य विभाग ने 15.16 प्रतिशत धान खरीद की है।
इस तरह जिले में अब तक लक्ष्य के सापेक्ष कुल 20.57 प्रतिशत ही धान की खरीद हो पाई है। जिले में निर्धारित लक्ष्य के सापेक्ष क्रय एजेंसियों को खरीद का लक्ष्य दिया गया था। इसके सापेक्ष क्रय एजेंसियों पर अक्तूबर में ही किसानों ने अपना पंजीकरण कराकर अपने आप को सूचीबद्ध करा लिया था। यह बात और है कि अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। यही नहीं जो किसान अभी तक सूचीबद्ध नहीं हो पाए हैं संभवता उनका नंबर भी धान बेचने के लिए कभी न आए।
धान खरीद व उसके भुगतान की समीक्षा प्रतिदिन की जा रही है। फिलहाल अभी कोई समस्या नहीं है। यदि किसानों को कहीं कोई समस्या आ रही हो तो उनके कार्यालय से शिकायत कर सकते हैं। - योगानंद पांडेय, अपर जिलाधिकारी
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