भिनगा के निकट मौसम की परवाह न कर खेत की सिंचाई करता किसान
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। तराई में मौसम का मिजाज गुरुवार को तीसरे दिन भी ठंडा बना रहा। हालांकि दोपहर बाद सूरज निकलने से तीन दिन बाद लोगों को धूप की चमक दिखी। इसके बाद भी दिन भर छाई धुंध व सर्द पछुआ हवा ने लोगों को परेशान किया। ठिठुरन के चलते लोग घरों में ही दुबके रहने को मजबूर भी दिखे। ठंड के तीखे तेवर के बाद भी अलाव की आंच ठंडी पड़ेने से गरीबों व जरूरतमंदों को पूस की सर्द हवाओं का कहर झेलना पड़ा। सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलवाने व कंबल बांटने के प्रशासनिक दावे भी बस कागजों में सिमटे नजर आए।
दूसरी तरफ खेती-किसानी से जुड़े लोगों की माने तो लगातार पड़ रहा कोहरा गेहूं के लिए वरदान तो सरसों सहित दलहनी व आलू की फसलों के लिए नुकसानदायक साबित होगा। तराई इलाके में मौसम का मिजाज लगातार सितम ढा रहा है। सर्द बर्फीली पछुआ हवा के चलने से ठिठुरन बरकरार है। ऐसे में जरूरी काम होने पर ही लोग घरों से बाहर निकल रहे हैं। ठंड के बढ़ते प्रकोप का असर बाजार में भी दिखने लगा है। आने वाले दिनों में मौसम विभाग ने तापमान में और गिरावट का अलर्ट भी जारी किया है।
गेहूं को फायदा तो सरसों व आलू को नुकसान
जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि कड़ाके की ठंड व कोहरे का फायदा गेहूं तथा जौ की फसल को मिलेगा। जबकि लाही, सरसों व तोरिया सहित आलू की फसल को नुकसान होगा। ऐसे में किसानों को चाहिए कि नुकसान से बचने के लिए खेतों की सिंचाई करें तथा नमी बनाए रखें। इससे तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस की बढ़ोत्तरी होगी। जो फसल को नुकसान से बचाएंगी। अरहर की फसल को भी कोहरे व पाले से नुकसान हो सकता है।
बच्चों व बुर्जुगों का रखे विशेष ध्यान
चिकित्सकों ने भी लगातार बढ़ते ठंड के प्रकोप को देखते हुए बच्चों व बुजुर्गों को इससे बचाने के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। डॉ. मुकेश ने बताया कि इस दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही से कोल्ड डायरिया बच्चों को अपनी चपेट में ले सकता है। इससे बचने के लिए बच्चों को गर्म कपड़ों में रखने के साथ ही एकदम से ठंड में बाहर न निकलने दिया जाए। इसके साथ ही बुजुर्गों के साथ ही हृदय रोग की परेशानी से पीड़ित मरीजों के इलाज में भी इस मौसम में विशेषतौर पर सावधानी बरती जाए।
दुधारू पशुओं का ख्याल रखें पशुपालक
जिले के सीवीओ डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि ठंड से पालतू पशुओं को बचाने के लिए भी पशुपालक को विशेष सावधानी बरतना चाहिए। ठंड से बचाव के लिए उन्हें ढकने के लिए बोरे का ओढ़ावन बनाने के साथ ही पीने में गुनगुने पानी के साथ गुड़ व खड़िया मिट्टी खिलाई जाए।