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रातों रात बन गए खद्दरधारी, विकास का कर रहे दावा

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श्रावस्ती। चुनाव में नए नए चमत्कार होते रहते हैं। जीतने वाला हार जाता है तो जो चर्चा में ही नहीं होता वह जीत जाता है। शायद इन्हीं उदाहरणों को देखते हुए जिला पंचायत सदस्य पद के लिए कई नए चेहरे उतर आए हैं। मैदान में उतरने के लिए इन लोगों ने रातों रात खद्दर धारण कर लिया है। जिसके चलते क्षेत्र में चुनाव के साथ-साथ हास्य का भी माहौल है।
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अवसर का लाभ लेने वाला ही बुद्धिमान कहलाता है। यह कहावत पंचायत चुनाव में साफ तौर पर जिले में देखी जा रही है। पंचायत चुनाव में आरक्षण की सूची आने के बाद कई लोगों के चेहरों पर उतार चढ़ाव भी देखने को मिल रहा है। इसका कारण है कि कुछ लोग वर्षों से इस सीट पर अपनी दावेदारी प्रस्तुत करने का इंतजार कर रहे थे। वह आरक्षण के रोस्टर में चली गई, या फिर जो आरक्षित वर्ग के लोग पुन: उसी सीट पर अपना दावा ठोक रहे थे। वह सामान्य हो गई। ऐसे में चुनाव लड़ने वालों की संख्या में भी इजाफा होना स्वाभाविक है।
आरक्षण के इस नए जातीय समीकरण से रातों रात नए खद्दरधारी मैदान में उतर आए हैं। ऐसा कुछ गिलौला व इकौना में ज्यादा तौर पर देखने को मिल रहा है। यहां वार्ड नंबर 15,16 व 17 पर पहले से ही सामान्य वर्ग के कई लोग अपना दावा ठोक रहे थे। इसी प्रकार वार्ड नंबर 19 पर भी एक माननीय के परिजन दावा ठोक रहे थे। यह माना जा रहा था कि जिला पंचायत आरक्षण सूची में यह पंचायतें सामान्य हो सकती हैं। इसके लिए अफवाहों का बाजार भी गर्म था। दावा तो यहां तक था कि यह क्षेत्र एक माननीय के अंतर्गत होने के कारण आरक्षण से मुक्त रहेगा ही। लेकिन जब आरक्षण की सूची आई तो दावे वाले समस्त सीटें रोस्टर के हिसाब से आरक्षित हो गई।
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इस आरक्षण का नतीजा यह रहा कि जहां पहले से इस सीट को सामान्य मानते हुए कुछ लोग मैदान में उतर कर पोस्टर वार शुरू कर चुके थे। उन्हें अब वापस अपने घरों में बैठ जाना पड़ा। इस अवसर का लाभ आरक्षण वाले वर्ग के लोगों को हुआ। जो इस सीट पर कभी दावा ही नहीं कर रहे थे। वह रातोंरात कुर्ता पैजामा पहन कर खद्दरधारी हो गए। यही नहीं वह अपनी जीत सुनिश्चित मान कर मैदान में उतर आए हैं। यही स्थिति कुछ सिरसिया के वार्ड नंबर दो व तीन में भी देखने को मिली। यहां भी पहले सामान्य वर्ग के लोगों द्वारा अपना प्रचार प्रसार शुरू किया गया था। लेकिन रोस्टर ने उन्हें भी घर बैठा दिया। यहां दावा अब आरक्षित वर्ग का है। जो कभी भी चुनाव के बारे में सोच भी नहीं रहे थे।
इन सीटों पर रहेगा सबसे ज्यादा द्वंद्व
जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव तो जिले की सभी 22 सीटों पर होना है। लेकिन सबसे ज्यादा लड़ाई हरिहरपुररानी के वार्ड नंबर छह व सात, इकौना में वार्ड संख्या 18, 20 व 22 में देखने को मिलेगा। इन सीटों पर जिले के दो माननीयों का आने वाला भविष्य दांव पर लगा है। यही नहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनारक्षित होने के कारण इन्हीं पांच सीटों में से कोई एक विजेता उस कुर्सी पर कब्जा भी करेगा। इन पांच सीटों में से दो की जिसमें हरिहरपुररानी के वार्ड नंबर सात व इकौना के वार्ड नंबर 18 की चर्चा ज्यादा है। बताया जा रहा है कि वार्ड नंबर सात से पूर्व मंत्री व सांसद दद्दन मिश्रा की पत्नी विमला मिश्रा तो वार्ड नंबर 18 से विधायक श्रावस्ती रामफेरन पांडे के बड़े पुत्र अपना दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। यह बात और है कि अभी तक दोनों पक्षों की ओर से चुनाव लड़ने कि पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन यदि दोनों मैदान में आते हैं तो यह माना जा सकता है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए इसमें से जीतने वाले लोग भी यही दावेदारों के रूप में उभर कर आएंगे।
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