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एआरपी परीक्षा में सिर्फ 24 शिक्षक पास

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श्रावस्ती। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा उन्नयन के लिए एआरपी की तैनाती होनी है। इनका चयन स्कूलों में तैनात शिक्षकों के बीच से होना है। तैनाती का आधार लिखित परीक्षा, शिक्षण कौशल व साक्षात्कार है। इसके लिए जिले में पच्चीस पद रिक्त हैं। इन रिक्तियों के सापेक्ष जहां 39 शिक्षकों ने आवेदन किया था वहीं परीक्षा में मात्र चौबीस शिक्षक ही उत्तीर्ण हो पाए। इसमें अधिकांश केवल पास होने के अंक व उसके आसपास पहुंच पाए। फेल शिक्षकों में अधिकांश पूर्णांक का पंद्रह फीसदी भी अंक न प्राप्त कर सके। इस परीक्षा परिणाम से जिले में शिक्षकों के शैक्षिक स्तर पर प्रश्न चिन्ह भी उठा रहे हैं।
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परिषदीय विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर सुधारने के लिए प्रत्येक ब्लॉक में पांच पांच एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) की तैनाती होनी है। यह तैनाती जिले में कार्यरत शिक्षकों के बीच से होनी है। इस पद के लिए जिले में 39 शिक्षकों ने आवेदन किया। इसकी परीक्षा विभाग ने अभी हाल में कराई। परीक्षा का पूर्णांक 60 नंबर का था।
इसमें साठ प्रतिशत अंक पाने वाले को ही उत्तीर्ण माना जाना था। जब रिजल्ट आया तो स्थिति चौंकाने वाली नजर गई। जिले में रिक्त पच्चीस पदों के सापेक्ष मात्र चौबीस शिक्षक ही लिखित परीक्षा उत्तीर्ण कर पाए। अभी उनका तीस अंक का टीचिंग व दस अंक का साक्षात्कार अवशेष है। परीक्षा में उत्तीर्ण शिक्षक पास होने के अंक 36 के आसपास ही पा सके थे।
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उत्तीर्ण शिक्षकों के बजाए इस परीक्षा में फेल होने वाले अध्यापकों की चर्चा ज्यादा है। परीक्षा के दौरान गणित के एक अध्यापक को मात्र आठ अंक ही प्राप्त हो पाए, जबकि एक अन्य शिक्षक को 17 तो तीसरे को 18 अंक प्राप्त हुए। इस प्रकार 30-31 नंबर पाने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रही। यही नहीं जिन शिक्षकों ने हिंदी विषय को लेकर परीक्षा उत्तीर्ण की ही उनमें से अधिकांश मात्र 36 अंक ही प्राप्त कर पाए।
फेल होने वालों में सबसे ज्यादा संख्या सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षकों की रही। संबंधित विषय के कुछ शिक्षक मात्र 22 अंक ही प्राप्त कर सके। वहीं पास होने वाले शिक्षक भी मात्र उत्तीर्ण अंक ही पा सके। शिक्षकों की यह परीक्षा अब जिले में चर्चा का विषय बना गई है।
बुद्धिजीवियों में बना चर्चा का केंद्र
बुद्धिजीवियों की माने तो जिले में शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है। जो शिक्षक साठ अंक की परीक्षा में मात्र उत्तीर्ण होने भर के अंक नहीं प्राप्त कर पा रहा हो वह बच्चों को क्या पढ़ाएगा। समाज सेवी द्वारिका प्रसाद का कहना है कि यह तो बानगी मात्र है। यदि जिले के सभी शिक्षकों की उन्हीं के विषय से संबंधित परीक्षा कराई जाए, तो शायद ही 20 फीसदी शिक्षक पास हो सके। इसका कारण शिक्षा स्तर में लगातार गिरावट दर्ज होना है। कुछ शिक्षक ऐसे भी हैं जिनकी शैक्षिक कला कौशल अन्य से भिन्न है, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी संख्या बहुत कम है।
इन विषय से होगा एआरपी का चयन
जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक एआरपी का चयन समाज शास्त्र, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, सैन्य विज्ञान, सांख्यिकी और कृषि विषय से किया जा रहा है। एक-एक एआरपी हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान विषय के होंगे।
विषयवार माइक्रो टीचिंग प्रदर्शन के लिए मूल्यांकन समिति गठित की गई है। विषयवार लिखित परीक्षा 60 अंक की होगी। माइक्रो टीचिंग शिक्षण प्रदर्शन 30 अंक का होगा।10 अंक का साक्षात्कार होगा। लिखित परीक्षा में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही माइक्रो टीचिंग-शिक्षण प्रदर्शन के लिए पात्र होंगे। वहीं माइक्त्रसे टीचिंग में 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले ही साक्षात्कार के लिए पात्र घोषित किए जाएंगे।
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- ओमकार राणा, बीएसए
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