भारत व नेपाल संबंध के बीच चीन के आ जाने के कारण पहली बार नेपाल ने भी सीमा ऑब्जर्वेशन पोस्ट (बीओपी) का निर्माण किया है। इससे पहले दोनों देशों के सीमा के रखवाली की जिम्मेदारी भारत के पास ही थी। नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में केवल पुलिस (नेपाल प्रहरी) का थाना ही था। इस तरह श्रावस्ती सीमा क्षेत्र में नेपाल की ओर से भगवानपुर व नरैनापुर में थाना था। जबकि सुईया में एक पुलिस चौकी हुआ करती थी। जिसे नेपाल में माओवादी आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने ब्लास्ट कर उड़ा दिया था। माओवादी आंदोलन के दौरान भगवानपुर थाना भी बंद कर दिया गया था। यहां तैनात पुलिस को नरैनापुर थाने में ही शिफ्ट कर दिया गया था। उस दौरान भी नेपाल व भारत दोनों ओर से सीमा की रखवाली का जिम्मा भारत के पास ही था। यह पहला मौका है जब नेपाल ने बॉर्डर पर सशस्त्र प्रहरी तैनात किए हैं।
भूलवश भी मवेशी जाने पर नेपाल पुलिस करती है उत्पीड़न
श्रावस्ती के समानांतर नेपाल क्षेत्र में तैनात एपीएफ के बारे में सागर गांव पंचायत के प्रधान अजय पाठक बताते हैं कि नेपाल के चौफेरी में एपीएफ जवानों के कैंप की तरफ भारतीय लोगों को जाने नही दिया जाता है। उन्हें उत्पीड़न करके भगा दिया जाता है। वहीं कलकलवा के पूर्व प्रधान विनोद वर्मा बताते हैं कि गांव के किसान खेतों में जाते हैं भूलवश मवेशी नेपाल की सीमाओं में चले गये तो दौड़ा कर भगा देते हैं। राप्ती नदी के इस पार खेत में हैं राप्ती के पार नेपाल है। जहां एपीएफ जवानों का डेरा है।
शिकायत मिली तो करेंगे एपीएफ से बात
नेपाली एपीएफ की ओर से भारत के किसी भी नागरिक उत्पीड़न की जानकारी एसएसबी के पास नहीं है। कुछ दिन पूर्व एसएसबी व एपीएफ की ज्वाइंट मीटिंग हुई थी। जिसमें सभी मुद्दों पर वार्ता हुई है। इसके बाद भी यदि किसी भारतीय नागरिक को एपीएफ से शिकायत हो तो वह किसी भी बीओपी कमांडर के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। उसकी शिकायत पर एपीएफ से वार्ता की जाएगी।
-जय सिंह प्रभारी, कमांडेंट एसएसबी