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नेपाल सीमा सील, लेकिन फसल कटाई के लिए दोनों तरफ से आ जा रहे ग्रामीण

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श्रावस्ती। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा को पहले ही औपचारिक रूप से सील कर दिया गया था। लॉकडाउन में किसानों को खेतों में काम करने के लिए छूट में मिली है। इसी छूट का फायदा अब नेपाल के नागरिक उठा रहे हैं। प्रतिदिन तड़के नेपाली नागरिकों का जत्था जमुनहा के बाजार पहुंच रहा है। यहां से वे अपनी जरूरत का सामान खरीदकर आठ बजे तक वापस हो रहे हैं। इस दौरान कोई भी संक्रमित व्यक्ति आ सकता है जिससे जिले में कोहराम की स्थिति मच सकती है।
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श्रावस्ती जिले की सीमा लगभग 90 किलोमीटर नेपाल से सटी हुई है। पूरे सीमा क्षेत्र में एक भी औपचारिक रास्ता नहीं है जिससे लोग आ-जा सकें। जो भी रास्ते हैं, वे सब या तो पगडंडियों से जुड़े हैं या फिर खेत-खलिहान से। केवल तालबघौड़ा स्थित सुइया से ही सड़क मार्ग से नेपाल से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद यहां कोई कस्टम कार्यालय न होने के कारण लोगों को औपचारिक रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं है। इसके बाद भी लोग आ-जा रहे हैं।
वहीं लॉकडाउन के दौरान इस नेपाल सीमा को सील किए जाने का दावा प्रशासन ने किया है। चिह्नित स्थानों पर एसएसबी व पुलिस की तैनाती है। वहीं दूसरी ओर नेपाल में भी लॉकडाउन होने के कारण वहां भी अपनी ओर से सीमा सील किया गया है लेकिन इस सबके बावजूद सीमा के दोनों तरफ लोगों का आना-जाना बरकरार है। सुबह आठ बजे तक जमुनहा के बाजार में नेपाली नागरिक जरूरी सामान खरीदने के लिए देखे जाते हैं। यह तो बानगी मात्र है। खेत-खलिहान में इस तरह से दोनों तरफ आने-जाने वाले लोगों की भीड़ हमेशा देखी जा सकती है।
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भारत-नेपाल सीमा के नोमेंस लैंड के किनारे ही भरथा रोशनगबढ़, घुड़दौरिया, ककरदरी, रानीपुर व शंकर नगर कोटिया गांव बसा हुआ है। नोमेंस लैंड के दोनों तरफ ही एक भरापुरा गांव हैं। छह-सात सौ की आबादी है। देखा जाए तो दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे के परिवार से जुड़े हुए हैं जिसके चलते दिन भर आना-जाना लगा रहता है। यही नहीं खेत-खलिहान भी दोनों तरफ के इधर-उधर हैं।
ऐसे में इन गांव के साथ अन्य क्षेत्रों में लोग दिन भर सीमा पार करते हैं। ऐसे में कोई अवांछित तत्व जो सोच-समझ कर संक्रमण फैलाना चाहे, वह इन गांवों के रास्ते से कहीं भी जा सकता है क्योंकि इसी गांव से सटा जंगल सीधे भिनगा तक जुड़ा हुआ है। यहां से निकलने वाला व्यक्ति जंगल के रास्ते भिनगा, सिरसिया व जमुनहा, कहीं भी आ सकता है।
तब्लीगी जमात मरकज का प्रभाव श्रावस्ती के हर कोने में है। सीमा क्षेत्र के जमुनहा के मंतुरी गांव में ऐसे ही नौ तब्लीगी मौलाना एक मदरसे में छिपे मिले थे जिनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुआ था। इसी प्रकार सीमा के दोनों ओर तब्लीगी का अच्छा खासा प्रभाव है। इसीलिए विदेशों से धर्म प्रचार करने वाले मौलाना बिना किसी जरूरी कागजात के सीमा पार करके आते-जाते रहते हैं। ऐसे में किसी भी आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
एएसपी बीसी दुबे ने बताया कि सीमा क्षेत्र में एसएसबी के साथ पुलिस की खास निगरानी है। इसके बाद भी यदि कोई घर से निकल कर सड़क पर आता है तो उस पर कार्रवाई के लिए पीआरवी व अन्य पुलिस टीम तैनात है। इसके साथ ही आम लोगों से भी अपील की गई है कि वह किसी भी बाहरी व्यक्ति को देखते ही उसकी सूचना दें।
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