गंध कुटी में प्रार्थना करते बौद्ध अनुयायी।- संवाद
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को म्यांमार से आए बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद की अध्यक्षता में अपने रीति रिवाज के अनुसार बोधिवृक्ष की पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु ने कहा कि बौद्धिक साधना से ही हम सम्प्रज्ञान व प्रज्ञा परमार्थ धर्म को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं। भगवान बुद्ध ने कहा है कि जो कोई बुद्धिमान मनुष्य अपना वर्तमान जीवन सुख-शांति से जीना चाहता है, सद्गति चाहता है, तो उसे इन चार पाथेयों की समय रहते व्यवस्था कर लेनी चाहिए।
इन पाथेयों में शील, श्रुति, सत्पुरुष संवास व भावना शामिल है। उन्होंने कहा कि काया, वाणी व मन से सभी बुरे कर्मों का दृढ़ निश्चय कर त्याग कर देना चाहिए। सभा के बाद बौद्ध अनुयायियों ने विभिन्न मठ व मंदिरों का भ्रमण कर उसकी प्राचीनता को देखा और समझा। इस दौरान काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।