श्रावस्ती। ब्लॉक प्रमुख पद को लेकर जमुनहा ब्लॉक में महासंग्राम मचा हुआ है। यह महासंग्राम भाजपा के खेमे में है। इसका कारण पूर्व मंत्री के बेटे के मैदान में आने से प्रारंभ हुआ। पार्टी की ओर से अन्य दावेदार इसे अवसरवादी राजनीति बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज करा रहे हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए ब्लॉक प्रमुख पद पर इसी सप्ताह अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। इसी के साथ ही भाजपा के खेमे में टिकट मांगने वालों की कतार भी लंबी होती चली जा रही है। लेकिन इस कतार में पूर्व मंत्री व बहराइच सदर विधायक अनुपमा जायसवाल के बेटे शिवम जायसवाल के मैदान में आने के बाद महासंग्राम की स्थिति बन गई है। जमुनहा से ब्लॉक प्रमुख पद के दावेदार ही नहीं बल्कि आम कार्यकर्ता पूर्व मंत्री के बेटे की दावेदारी को लेकर असहज व आक्रोशित हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं व भाजपा के राजनीति में रुचि रखने वाले स्थानीय लोगों की मानी जाए तो पूर्व मंत्री के बेटे की दावेदारी महज अवसरवादी राजनीति का उदाहरण मात्र है।
इसका कारण है कि पूर्व मंत्री की ससुराल भले ही जमुनहा के कथरा माफी गांव मे हो। लेकिन लगभग दो दशक से वह यहां के सामाजिक व्यवस्थाओं से अलग हो चुकी हैं। यहां तक कि मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने न तो अपने ससुराल के गांव की सुध ली। और न ही विकास खंड के लिए ही कुछ किया। हालत यह है कि उन्हीं के गांव में जाने के लिए लोगों को जलभराव, कीचड़ को तो पार करना ही पड़ता है। साथ ही कुछ स्थानों पर लोगों को जाने के लिए बाढ़ के बाद आज भी नाव का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ऐसे में जब आज ब्लॉक प्रमुख पद के लिए चुनाव की बारी आई तो उनकी दावेदारी महज अवसरवादी कही जाएगी।
यही नहीं स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि सरकार के आरक्षण रोस्टर में इस विकास खंड को सामान्य श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार को यदि यहां से अवसर मिलता है तो इससे सामाजिक समरसता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय लोग यहां के लिए सुरेश रिजवानी उर्फ बिट्टू रिजवानी का नाम प्रमुख पद के दावेदारों में प्रमुखता से ले रहे हैं। इन लोगों का दावा है कि उनके द्वारा न केवल कोविड काल में बल्कि वर्षों से लोगों के साथ कंधे से कंधा मिला कर सामाजिक समरसता को बढ़ावा दिया गया है। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति के बजाए उन लोगों को भाजपा टिकट के लिए प्राथमिकता दें जिनका योगदान स्थानीय स्तर पर बेहतर हो। न कि जो केवल पद के लिए अवसर आने पर ही क्षेत्र में आते हों।