जेतवन परिसर में वर्षावास की पूजा करते बौद्ध अनुयायी।
श्रावस्ती: कटरा क्षेत्र के ओड़ाझार स्तूप में अनाथ पिंडक चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर मंगल पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम भिक्षु संघ और भिक्षु देवेंद्र महाथेरो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
इस दौरान सभी जीवों के दुखों से मुक्ति के लिए पूजा-अर्चना की गई। भिक्षु देवेंद्र महाथेरो ने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा को भगवान बुद्ध का गर्भ मंगल, गृह त्याग और धर्म चक्र परिवर्तन हुआ था।
इसे त्रिविध पावनी आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इसी दिन से वर्षावास शुरू होता है, जो कुमार पूर्णिमा तक चलता है।
वर्षा ऋतु में आवागमन बाधित होने के कारण भगवान बुद्ध ने भिक्षुओं के लिए वर्षावास की व्यवस्था की थी। इस दौरान भिक्षु एक स्थान पर रहकर धर्म, विनय का अनुशीलन और ध्यान करते हैं।
कार्यक्रम में श्रद्धा लोक (श्रीलंका बुद्ध विहार), ओवाथा म्यांमार बुद्ध विहार, संघपाल इंडियन बुद्ध विहार सहित मित्र सेन, चरिया, धम्म प्रीति और भंवरानंद मौजूद रहे।
जेतवन परिसर में वर्षावास की पूजा करते बौद्ध अनुयायी।