कुटी में शनिवार को प्रार्थना करते हिमाचल से आए बौद्ध अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को हिमाचल प्रदेश से आए अनुयायियों के 80 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो के नेतृत्व में अपने रीति-रिवाज से गंध कुटी पर पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहा कि जीवन में पवित्रता रखना धम्म है। शरीर, वाणी और मन की पवित्रताएं व जीवन में पूर्णता प्राप्त करना भी धम्म है। निर्वाण से बढ़कर सुखद कुछ नहीं है। तृष्णा और लोभ का त्याग, कर्म को नैतिक व्यवस्था का साधन मानना भी धम्म है।
आगे बताया कि प्राकृतिक नियमों से परे विश्वास करना धम्म नहीं है। आत्मा-परमात्मा में विश्वास करना, बलि में विश्वास, निराधार कल्पना, धम्म की पुस्तकों का अध्ययन मात्र धम्म नहीं है। अनुयायियों ने बौद्ध सभा के बाद तपोस्थली के विभिन्न स्थलों का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।