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रक्त दान कर तेरह बने महादानी

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श्रावस्ती। विश्व रक्तदाता माह के तहत अमर उजाला फाउंडेशन एवं सत्य नारायण उच्च शिक्षा संस्थान तुलसीपुर की ओर से रविवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर के प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने की। इस दौरान 13 छात्र रक्तदान कर महादानी बने। विशिष्ट अतिथि के रूप में एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर के भौतिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार द्विवेदी, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के राष्ट्रीय सेवायोजन समन्वयक डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह मौजूद रहे।
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रक्त की एक बूंद भी आवश्यकता पड़ने पर किसी की जान बचा सकती है। रक्तदान देकर दूसरे का जीवन बचाया जा सकता है। इसी उद्देश्य के साथ सामाजिक सरोकार के प्रति समर्पित अमर उजाला फाउंडेशन ने सत्य नारायण उच्च शिक्षा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में रक्तदान शिविर आयोजित किया। इसमें महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवायोजन इकाई से जुड़े छात्र रक्तदान करके महादानी बने।
इस कैंप का शुभारंभ करते हुए एमएलके पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके सिंह ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन व राष्ट्रीय सेवा योजन इकाई के इस संयुक्त आयोजन से लोगों को प्रेरणा मिलेगी। रक्तदान करने से शरीर में कमजोर नहीं आती है। यह शरीर अपने आवश्यकता के समस्त तत्वों को स्वत: प्रकृति से ग्रहण कर लेता है। इसलिए इस महाअभियान से सभी को जुड़ना चाहिए। वहीं इस दौरान सिद्धार्थ विश्व विद्यालय कपिलवस्तु के राष्ट्रीय सेवा योजन के समन्वय डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवायोजन का उद्देश्य छात्रों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ना है।
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ताकि वह शिक्षा के साथ अपने नैतिक कर्तव्यों का पालन आसानी कर सकें। इस महाविद्यालय में लगा शिविर निश्चित ही सामाजिक सरोकार की ओर बढ़ता एक कदम है। इस तरह के आयोजन जिले के अन्य जगहों पर भी होने चाहिए। महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. एमएल वर्मा ने कहा कि एक बेहतर संयोग है कि सत्य नारायण उच्च शिक्षा संस्थान की राष्ट्रीय सेवायोजन इकाई एक नई पहल के तहत रक्तदान कर रही है। तो अमर उजाला फाउंडेशन इस महान कार्य में हमारे साथ है।
जिला ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. वीएन वर्मा ने कहा कि रक्तदान को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां है। इससे अक्सर लोग रक्तदान के नाम पर घबरा जाते हैं। वास्तव में ऐसा नहीं है। रक्तदान एक सामान्य प्रक्रिया है। इससे न तो कमजोरी आती है न तो इसे बनने में बहुत समय लगता है। कुछ ही घंटों में जितनी आवश्यकता है उतना रक्त तैयार हो जाता है। बस इसमें यही सावधानी बरतनी चाहिए कि कभी खाली पेट रक्तदान न करें। रक्तदान के कुछ देर बाद कोई भारी भरकम काम न करके कुछ देर विश्राम करें। इसके बाद सब सामान्य हो जाता है। शिविर में उमा मिश्रा, आशीष कैराती, पुनीत मिश्रा, ज्ञानेंद्र कुमार त्रिपाठी, मोहम्मद युसूफ, अखिलेश प्रताप सिंह, मिलिंद कुमार सहित कुल 13 लोगों ने रक्तदान किया।
शिक्षिका उमा मिश्रा ने कहा कि रक्तदान एक पुनीत कार्य है। इससे बड़ा कोई दान नहीं है। इसीलिए जब विद्यालय में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ तो मैने सबसे पहले रक्तदान करने की सोची। रक्तदान के बाद बेहतर अनुभव हुआ। इससे न तो किसी प्रकार कोई कमजोरी महसूस हुई, और न कोई अन्य परिवर्तन। -
आशीष कैराती ने कहा कि जब विद्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन के सहयोग से शिविर का आयोजन हुआ तो मेरे मन में आया कि मुझे भी रक्तदान करना चाहिए। रक्तदान से पूर्व मेरे मनमें कई प्रकार की भ्रांतियां थीं, लेकिन रक्तदान के बाद सभी भ्रांतियां दूर हो गई। रक्तदान एक महान कार्य है।
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