संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। जिले में आई फ्लू व संक्रामक रोग का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। अस्पताल में हर दूसरा मरीज आई फ्लू का शिकार है जबकि हर चौथा मरीज या तो डायरिया व वायरल फीवर से ग्रसित है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थलों पर आई फ्लू को लेकर न तो लोग गंभीर दिख रहे हैं, और न ही सुरक्षा के इंतजाम हैं।
तराई में आए दिन हो रही बरसात व चिपचिपाहट वाली गर्मी के कारण बढ़ी नमी से आई फ्लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बात चाहे सीएचसी, पीएचसी की हो अथवा संयुक्त जिला चिकित्सालय की। यहां आने वाला हर दूसरा मरीज आई फ्लू की चपेट में देखा जा रहा है। इसके बावजूद जिले में आई फ्लू के संक्रमण को लेकर लोग गंभीर नहीं दिख रहे हैं। चाहे सार्वजनिक स्थल हो, कोर्ट कचहरी या फिर यात्री वाहन। कहीं भी लोग चश्मे का प्रयोग करते नहीं दिख रहे हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में पर्चा बनवाने के लिए लगी मरीजों की यह कतार सच्चाई उजागर कर रही है जिसमें आधे से अधिक मरीज आई फ्लू के शिकार हैं। वहीं अस्पताल आने वाला हर चौथा मरीज उल्टी दस्त, पेट दर्द व डायरिया से ग्रसित है। शेष मरीजों में ज्यादातर मरीज वायरल फीवर से पीड़ित हैं। नेत्र सर्जन डा. फणींद्र तिवारी का कहना है कि आई फ्लू के मरीज बगैर काला चश्मा लगाएं बाहर न निकलें। यह छुआछूत की बीमारी है। लोगों को चाहिए कि एहतियात बरतें।
वहीं फिजीशियन डा. अजय सिंह का कहना है कि बरसात के मौसम में जल जनित बीमारियों, वायरल फीवर, डायरिया, उल्टी दस्त व पेट दर्द की शिकायत आम है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह पानी को उबाल कर अथवा उसमें क्लोरीन की गोली डाल कर पिएं। संवाद