कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती आने वाले पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत है। बशर्ते बौद्ध अनुयायी व पर्यटक सुविधा न मांगे। यहां मुफ्त रहने व खाने को तो छोड़िए पीने के लिए शीतल पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बुद्ध स्थली आने वाले पर्यटकों को सस्ते होटल व भोजन के लिए जिले की सीमा से सटे बलरामपुर जिले का सहारा लेना पड़ता है।
दुनिया को शांति का संदेश देने वाली बुद्ध की धरती पर आने वाले बौद्ध अनुयायियों व पर्यटकों को भोजन व पानी अपने साथ लेकर आना पड़ता है। बौद्ध तपोस्थली में संपन्न लोगों के लिए फाइव स्टार होटल में ठहरने की व्यवस्था तो है लेकिन आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों के मुफ्त रहने के लिए प्रशासन व बौद्ध समुदाय की तरफ से कोई इंतजाम नहीं है।
तपोस्थली स्थित कंबोडिया मंदिर, कोरिया मंदिर व लंका मंदिर में धर्मशाला मौजूद है, लेकिन यहां रुकने के लिए 600 रुपये प्रति कमरा भुगतान करना पड़ता है। इनमें भोजन की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं अन्य बड़े होटलों में रहने व भोजन की व्यवस्था के लिए प्रति रूम 5800 रुपये देना पड़ते हैं। लामा बौद्ध मंदिर कहने के लिए तो मुफ्त है, लेकिन यहां मात्र विदेशी पर्यटकों के रुकने की व्यवस्था है। इसके बदले में उन्हें डोनेशन देना पड़ता है।
मध्यम वर्गीय लोगों के लिए क्षेत्र का एक मात्र स्थानीय होटल अशोक धम्मा विहार है। इसका किराया भी प्रति व्यक्ति 200 रुपये की दर से चुकाना पड़ता है। इसके साथ ही खान-पान की व्यवस्था का खर्च अलग से उठाना पड़ता है।
खुद भोजन बनाने को विवश पर्यटक व अनुयायी
कटरा में एक मात्र ढाबा है जहां भोजन पानी की व्यवस्था है। शेष कोई व्यवस्था न होने के कारण तपोस्थली आने वाले पर्यटक व अनुयायी खाने पीने का सामान अपने साथ लाते हैं। उन्हें खुद बनाकर खाना पड़ता है। अन्यथा की स्थिति में उन्हें इकौना या फिर बलरामपुर जाना पड़ता है। यहीं नहीं विनियमित क्षेत्र में एक भी सरकारी अथवा जन प्रतिनिधियों के सहयोग से वाटर कूलर नहीं लगवाया गया है। ऐसे में लोगों को पानी भी खरीद कर पीना पड़ता है।
अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से मिल कर तपोस्थली में रैन बसेरा व वाट कूलर लगवाने की मांग की जाएगी। उम्मीद है कि समस्या को देखते हुए जिम्मेदार इसका समाधान करेंगे। भिक्षु भंवरानंद