श्रावस्ती। बूढ़ी राप्ती के किनारे स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (केजीबीवी) हरिहरपुररानी ने स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन के क्षेत्र में ऐसी मिसाल कायम की है कि उसे केजीबीवी श्रेणी में देश में पहला स्थान मिला है। प्रधानाध्यापिका कैशर जहां की 18 वर्षों की सतत मेहनत, छात्राओं में हाथ धोने की आदत विकसित करने और परिसर को हरित व स्वच्छ बनाने के प्रयासों ने विद्यालय की तस्वीर बदल दी।
वर्ष 2008 में प्रधानाध्यापिका के रूप में कार्यभार संभालने के समय विद्यालय में पेयजल और बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। छात्राओं को स्टेडियम से पानी लाना पड़ता था। इसके बाद कैशर जहां ने परिसर में नियमित पौधरोपण, हैंडपंप और वाटर प्यूरीफायर की व्यवस्था कराई। छात्राओं को साबुन से नियमित हाथ धोने का प्रशिक्षण दिया गया और स्वच्छता को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया। परिसर की साफ-सफाई और संसाधनों के सुव्यवस्थित रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
तीन मानकों पर मिले शत-प्रतिशत अंक
केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने अप्रैल में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग अभियान के तहत सर्वे कराया था। इसमें पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई, संचालन एवं रखरखाव, व्यवहार परिवर्तन, मिशन लाइफ गतिविधियां, स्वच्छता और हरित परिसर जैसे मानकों का मूल्यांकन किया गया। विद्यालय को हाथ धुलाई, संचालन एवं रखरखाव तथा व्यवहार परिवर्तन में 100-100 प्रतिशत अंक मिले। पेयजल में 95.45 प्रतिशत, शौचालय में 81.82 प्रतिशत और मिशन लाइफ गतिविधियों में 85.71 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। इन अंकों के आधार पर विद्यालय को समग्र रैंकिंग में देश में नौवां और उत्तर प्रदेश में सातवां स्थान मिला, जबकि केजीबीवी श्रेणी में यह देशभर में प्रथम रहा।
वाराणसी में मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित
प्रधानाध्यापिका कैशर जहां ने बताया कि राज्य स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों में केवल दो केजीबीवी शामिल थे। राष्ट्रीय स्तर पर 191 विद्यालयों का चयन हुआ। 17 जून को परिणाम घोषित होने के बाद आठ जुलाई को वाराणसी में आयोजित मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।