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जीएसटी में फंसा जेल निर्माण कार्य

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श्रावस्ती। जिले के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने जिला कारागार का निर्माण पूरा न होने पर नाराजगी जताई है। इस कार्य को जल्द पूरा करने का निर्देश भी दिया है। वहीं जेल का निर्माण कार्य वैट व जीएसटी में अंतर आने के कारण फंसा पड़ा है। दोनों के अंतर से लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये का अभाव बता कर निर्माण इकाई ने काम बंद कर रखा है।
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जिले में सबसे पुरानी परियोजना जेल निर्माण की है, जो अधूरी है। जेल निर्माण के लिए वर्ष 2012-13 में ही कार्य प्रारंभ किया गया था। जेल परिसर व कर्मचारी आवास के लिए कार्रदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने 104 करोड़ रुपये का स्टीमेट दिया था। इसके सापेक्ष 99 करोड़ रुपये का स्टीमेट स्वीकृत हो गया था।
इसके स्वीकृत होने के बाद राजकीय निर्माण निगम ने खुद ही जेल का निर्माण प्रारंभ कर दिया था। वर्ष 2017 के पहले जब तक जीएसटी लागू नहीं हुई थी तब तक कार्रदायी संस्था को लगभग 49 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। वहीं 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद कार्रदायी संस्था को विभाग ने 50 करोड़ रुपये का भुगतान किया। प्रदेश में टैक्स को लेकर नई नीति लागू होने के बाद कार्यदाई संस्था ने पचास करोड़ रुपये में से लगभग 12 फीसदी जीएसटी के रूप में जमा करा दिया।
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इससे पहले टैक्स वैट के रूप में मात्र चार फीसदी जमा हुआ था। इस अंतर के बाद कार्रदायी संस्था का मूल स्टीमेट से लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये टैक्स के रूप में जमा हो गया। इसी के चलते कार्रदायी संस्था ने वर्ष 2020 के प्रारंभ होते ही जेल निर्माण का कार्य अधूरा छोड़ दिया।
विभाग की माने तो अब निर्माण कार्य महज पांच फीसदी ही अवशेष है। यदि जीएसटी में जमा धन मिले तो यह कार्य भी पूरा हो। वहीं मुख्यमंत्री की ओर से की गई समीक्षा में इस अधूरे कार्य को लेकर नाराजगी जताई गई है। उन्होंने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया है कि निर्माणाधीन जिला जेल के बजट में कोई बदलाव नहीं होगा। पुनरीक्षित बजट भेजने की आदत कार्रदायी संस्थाओं को छोड़नी होगी।
जीएसटी अंतर सहित 13 करोड़ की संस्था ने की थी मांग
कार्रदायी संस्था की ओर से जिला कारागार के कार्य को पूर्ण करने के लिए पुनरीक्षित बजट के रूप में 13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेज कर बजट की मांग विगत एक वर्ष से की जा रही है। इस पुनरीक्षित बजट में विभाग 99 करोड़ के सापेक्ष 104 करोड़ जो कि मूल स्टीमेट में प्राविधानिक था, जो कि बजट का लगभग पांच फीसदी बनता है। उसके साथ ही 12 प्रतिशत जीएसटी व डेढ़ से दो प्रतिशत समय के साथ आई महंगाई को मिलाते हुए लगभग तेरह करोड़ रुपये की मांग की है।
एआरई सरोज सिंह ने बताया कि जिला कारागार निर्माण का कार्य महज पांच फीसदी ही अवशेष बचा है। इसके लिए जीएसटी डिफरेंस की मांग की जा रही है। यदि वह पैसा मिल जाता है तो कार्य पूरा हो सकता है। -
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