श्रावस्ती। गर्मियों की बढ़ती तपिश ने लोगों की प्यास को और बढ़ा दिया है, लेकिन जब पेयजल संसाधनों की स्थिति गंभीर हो तो प्यास बुझाना मुश्किल है। तहसीलों में शीतल जल उपलब्ध कराने के लिए लगाए गए वाटर कूलर खराब पड़े हैं, वहीं हैंडपंपों से निकलने वाला पानी भी दूषित हो चुका है। शनिवार को जब तहसीलों में पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया गया, तो यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।
जमुनहा तहसील की पेयजल व्यवस्था सिर्फ एक हैंडपंप तक सीमित है। तहसील परिसर में लगा एकमात्र वाटर कूलर करीब एक साल से खराब पड़ा हुआ है और उसकी टोटियां भी टूट चुकी हैं, जिससे वह पूरी तरह निष्प्रयोज्य हो गया है। तहसील में आने वाले फरियादियों और वकीलों को अब केवल एक हैंडपंप के सहारे अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है, जो समस्या को और बढ़ा देता है।
भिनगा तहसील में भी स्थितियां खस्ता हैं। यहां लगे वाटर कूलर महीनों से खराब पड़े हैं। हालांकि, तहसील परिसर में तीन हैंडपंप जरूर लगे हैं, लेकिन उनमें से निकलने वाला पानी थोड़ी देर बाद पीला हो जाता है। ऐसे में लोग या तो इन हैंडपंपों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं या फिर दुकानों से बिकने वाले पानी के पाउच खरीदकर प्यास बुझाते हैं।
भिनगा तहसील में एक वाटर कूलर ठीक हालत में है, लेकिन उसकी क्षमता बेहद कम है। यह केवल दो से तीन लोगों की प्यास बुझा पाता है, जिसके बाद अन्य लोगों को करीब 15 से 20 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इस गर्मी में इतनी कम क्षमता के वाटर कूलर की उपयोगिता पर सवाल उठता है।