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इंडो नेपाल बार्डर सड़क परियोजना पर लग सकता ग्रहण

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श्रावस्ती। संरक्षित वन्य जीव अभ्यारण्य में जीव जंतुओं की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने नानपारा मैलानी रेल लाइन का परिचालन बंद करने का आदेश दिया है। इस आदेश के साथ ही श्रावस्ती के सोहेलदेव संरक्षित वन्य जीव अभ्यारण में भारत नेपाल बार्डर से निकलने वाली सड़क के अस्तित्व पर भी खतरा मंडराने लगा है। यह परियोजना कुल 570 किलोमीटर की है। इसमें 299 किलोमीटर मार्ग टाइगर रिजर्व सेंच्युरी वन्य जीव अभ्यारण से होकर निकलता है। श्रावस्ती जिले से 105 किलोमीटर सड़क होकर गुजरती है। इसमें लगभग 71 किलोमीटर संरक्षित क्षेत्र का हिस्सा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस परियोजना को लेकर संशय की स्थिति बन गई है।
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बहराइच के नानपारा से मैलानी के मध्य वर्ष 1892 से 1898 के मध्य 170 किलोमीटर छोटी लाइन का निर्माण हुआ था। यह रेलवे लाइन बहराइच के कतर्निया वन्य जीव बिहार से होते हुए लखीमपुर के दुधवा नेशनल पार्क के बीच से होकर गुजरती थी। इसके चलते दोनों संरक्षित अभ्यारण में दुर्घटना के कारण अक्सर जीवों की मौत हुआ करती थी। इसको लेकर 2014-15 में दुधवा नेशनल पार्क के निदेशक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए इस रेलवे लाइन को बंद करने की मांग की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जल्द ही यह रेलवे लाइन बंद होने वाली है।
हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि किसी भी परियोजना को संरक्षित वन्य जीव के जीवन को दाव पर लगा कर चलने की मंजूरी नहीं दी जा सकी है। इस आदेश के बाद जिले से होकर गुजरने वाली भारत नेपाल बार्डर सड़क परियोजना (बीओपी से बीओपी को जोडने वाली) के अस्तित्व को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है। यह परियोजना प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महराजगंज और सिद्धार्थनगर जिले में भारत-नेपाल सीमा पर 570 किलोमीटर लंबी है। इसमें 299 किमी हिस्सा सीमा टाइगर रिजर्व, सेंक्चुरी (वन्य जीव अभ्यारण्य) और आरक्षित वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
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श्रावस्ती में पूरी परियोजना 105 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 71 किलोमीटर सोहेलदेव वन्य जीव अभ्यारण के बीच से होकर गुजरना है। अभी तक जंगल के मध्य से होकर गुजरने वाले मार्ग के लिए लोक निर्माण विभाग को एनओसी नहीं मिली थी। इसका कारण जंगल में सड़क निर्माण के लिए करीब 55 हजार पेड़ों का कटान की जद में आना था। बाद में इसे फायर लाइन से गुजारने की सहमति बनी। इस पर भी 1500-2000 पेड़ काटे जाने की बात कही गई।
अब वन्य जीव सुरक्षा को लेकर जहां हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है तो इसका असर इस परियोजना पर भी साफ तौर पर पड़ेगा। ऐसे में परियोजना जिस पर अभी तक अरबों रुपये खर्च हो चुका है, वह या तो खटाई पर पड़ जाएगी, या फिर उसे जंगल के बाहर मैदानी क्षेत्र में बनाना होगा। इससे सीमा पर तैनात एसएसबी को इस परियोजना का सीधे तौर पर फायदा नहीं होगा।
आतंकवादियों व नकली करेंसी पर लगाम लगाने की थी पहल
भारत में नेपाल के रास्ते से ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई नकली करेंसी भेजती है और आतंकियों के भी घुसने की घटनाएं होती रहती हैं। इसके मद्देनजर वर्ष 2011 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इंडो-नेपाल बार्डर पर रोड बनाने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी थी। यह रोड सीमा पर एसएसबी की ओर से बनाए गए बीओपी से बीओपी को जोड़ेगी।
हाईकोर्ट के आदेश का अभी अध्ययन नहीं हुआ है। आदेश का अध्ययन करने के बाद यह देखना होगा कि आदेश से कौन कौन से क्षेत्र आच्छादित हो रहे हैं। फिलहाल वन विभाग से जमीन के लिए एनओसी मांगी गई है। - दूधनाथ राम, अधिशासी अभियंता, इंडोनेपाल सड़क
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