कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में रोजाना सैकड़ों बौद्ध अनुयायी, पर्यटक व क्षेत्रीय लोग आते-जाते हैं। इनमें से अधिकांश लोग प्रार्थना करने तो शेष श्रावस्ती की खूबसूरती निहारने आते हैं। तपोस्थली में छाई वीरानी पर्यटकों व अनुयायियों को मायूस कर रही है।
बौद्ध तपोस्थली स्थित आनंद बोधि के बारे में बताया जाता है कि इसे तथागत भगवान बुद्ध के शिष्य आनंद ने बोध गया से लाकर यहां स्थापित किया था। इसी मान्यता के चलते तपोस्थली आने वाले बौद्ध अनुयायी व विदेशी पर्यटक आनंद बोधि का पत्ता ले जाना नहीं भूलते। इस पत्ते को बौद्ध अनुयायी पूजा स्थलों, घरों व दुकानों सहित अपनी तिजोरियों में रखते हैं। उनकी मान्यता है कि इससे उन्हें धन-धान्य में कमी नहीं रहेगी। कभी आनंद बोधि परिसर में विभिन्न प्रकार के फूलों की क्यारियां होती थीं। जो तपोस्थली आने वाले पर्यटक व अनुयायियों को आकर्षित करती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आनंद बोधि के आसपास न तो फूलों की क्यारियां हैं और न ही हरियाली। ऐसे में तपोस्थली की खूबसूरती निहारने आने वाले पर्यटकों व अनुयायियों को तपोस्थली में छाई वीरानी मायूस कर रही है।