गिलौला के चंदर्खा बुजुर्ग में बने बरात घर में चल रहा है ग्राम सचिवालय। -संवाद
श्रावस्ती। ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों का हाथ पीला करने में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 95 फीसदी गांवों में निर्देश के बाद भी सामुदायिक भवन व बरात घर का निर्माण नहीं कराया गया है। जहां इसका निर्माण भी हुआ, वहां या तो उसका दूसरे काम में उपयोग हो रहा है। या फिर गांव से काफी दूर स्थापित कराए जाने के कारण लोग उसका उपयोग करने से कतरा रहे हैं।तीन तहसील, पांच विकास खंड वाले श्रावस्ती जिले में 54 न्याय पंचायत व 397 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। जिनमें छोटे बड़े करीब 1500 से अधिक मजरे शामिल हैं। जिनमें करीब साढ़े बारह लाख की आबादी निवास करती है। इनमें से ब्लाॅक मुख्यालयों के गांवों को छोड़ दिया जाए तो शेष गांवों में मांगलिक आयोजनों विशेष कर वैवाहिक कार्यक्रमों में बरातियों को रोकने की कोई व्यवस्था नहीं है।
मांगलिक आयोजनों के लिए लोग सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से पूर्व परिषदीय विद्यालयों का सहारा लेते थे। आदेश के बाद इस पर भी रोक लगने से अब बरातियों को खेत खलिहान व बाग में रोका जा रहा है। जिससे आंधी या पानी आने पर घरातियों व बरातियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के प्रतिबंध के बाद शासन ने सभी डीएम व डीपीआरओ को ग्राम पंचायतों में राज्य निधि से बारात घर व सामुदायिक भवनों का निर्माण कराने का निर्देश दिया गया था। जिसका अनुपालन न होने से गांवों में मांगलिक आयोजनों के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं जिन गांवों में पूर्व में बारात घर बने भी वहां भी उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसका कारण या तो उन्हें आबादी से काफी दूर बनाया गया। या फिर उसका दूसरा उपयोग किया जाना है। देखा जाए तो जमुनहा के ग्राम ददौरा के मजरा शहादत नगर में बारात घर का निर्माण कराया गया थ। जिसे आबादी से काफी दूर बना दिए जाने के कारण ग्रामीण यहां जाने से कतराते हैं। इससे यहां बना बारात घर खंडहर में तब्दील हो रहा है।
वहीं गिलौला के चंदर्खा बुजुर्ग के मजरा लोनियन पुरवा में बने बारात घर का उपयोग ग्राम सचिवालय के रूप में किया जा रहा है। जबकि पास में ही कूड़ा पृथक्करण केंद्र स्थापित करा दिया गया है। जिससे ग्रामीण इसका उपयोग करने से कतरा रहे हैं।