श्रावस्ती। तराई में विगत एक पखवारे से भीषण उमस भरी गर्मी पड़ रही है। दिन रात चल रही पूर्वा हवाओं के बीच बादलों की लुकाछिपी व बूंदाबांदी ने शनिवार को लोगों को पसीने से तरबतर कर दिया। आर्द्रता बढ़ने के कारण लोग पंखों के नीचे भी पसीने से भीगे नजर आ आए। ऐसे में राहत के लिए हर किसी को बारिश का इंतजार है। वहीं उमस भरी गर्मी संक्रामक रोग की संभावना को भी बढ़ा रही है। जिसे लेकर लोग आशंकित नजर आ रहे हैं।
विगत पखवारे हुई बरसात के बाद निकलने वाली चिलचिलाती धूप से मौसम का मिजाज काफी गर्म हो चुका है। वहीं इस बीच विगत दो दिनों से शुरू हुई बादलों की लुकाछिपी तथा शनिवार को हुई बूंदाबांदी व पूर्वा हवाओं ने उमस काफी बढ़ा दी है। आर्द्रता सामान्य से अधिक होने के कारण लोग पंखों के नीचे भी पसीने से तरबतर नजर आ रहे हैं। जगह-जगह व्याप्त गंदगी के बीच बढ़ी उमस में संक्रामक रोग के फैलने की संभावना को बढ़ा रही है। जिसे लेकर लोग आशंकित नजर आ रहे हैं। जिले में बढ़ी उमस भरी गर्मी के बीच बिजली कटौती का सिलसिला भी बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आवाजाही ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे में राहत के लिए हर किसी को बरसात का इंतजार है।
कहीं पंपिंग सेट का सहारा तो कहीं बादलों की ओर निहार रहे किसान
जिले में विगत एक पखवारे से बरसात नहीं हुई। ऐसे में तराई क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य पूरी तरह से बाधित है। असिंचित क्षेत्र होने के कारण सिरसिया क्षेत्र के किसान बेहतर बरसात के लिए आसमान की ओर निहार रहे हैं। वहीं जिले के अन्य हिस्सों में धान की रोपाई व रोपित हो चुके धान के पौधों को सूखने से बचाने के लिए किसान पंपिंग सेटों का सहारा ले रहे हैं। सबसे खराब स्थिति सिरसिया क्षेत्र की है। जहां खेतों में धूल उड़ रही है। धान की नर्सरी तैयार होने के बावजूद पानी के अभाव में धान की रोपाई का कार्य ठप पड़ा है। यदि बरसात न हुई तो तराई क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य ठप रहेगा। जिससे खेती किसानी पिछड़ने के साथ ही पैदावारी प्रभावित होगी।