कटरा (श्रावस्ती)। गर्भधात्री महिलाओं व नवजात शिशुओं को बीमारियों से बचाने तथा मातृ शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए आशा महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा सकती हैं। इसके लिए आवश्यक है कि वे अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा व इमानदारी के साथ निर्वहन करें। साथ ही साथ आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रेरित करें।
ये बातें सोमवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकौना के सभागार में आशा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान सीएचसी अधीक्षक व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है। जल्द-जल्दी गर्भधारण करने से मां व शिशु दोनों ही कमजोर होते हैं। इससे उन्हें विभिन्न प्रकार की घातक बीमारियों का खतरा भी रहता है। दो बच्चों के बीच में कम से कम तीन वर्ष का अंतर होना चाहिए।
कहा कि प्रत्येक परिवार को हम दो हमारे दो नीति अपनानी चाहिए। बच्चों में अंतर रखने के लिए सभी प्रकार के परिवार नियोजन के तरीके अस्पताल में निशुल्क उपलब्ध हैं जिसे अपना कर बच्चों में आसानी से अंतर रखा जा सकता है। दो बच्चा होने के बाद नसबंदी कराएं। यदि ऐसा नहीं चाहते हैं तो अंतरा सबसे उपयुक्त है।
इस दौरान बीएनसी के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही नवजात शिशु का प्रबंधन कैसे किया जाए, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को जानकारी दी गई। आशा कार्यकर्ताओं को गृह भ्रमण के दौरान की जाने वाली गतिविधियों के बारे में बताया गया। सीएचसी अधीक्षक ने हाथ धोने का सही तरीका, थर्मामीटर का प्रयोग, वजन करने, पीलिया की जांच करने, त्वचा की जांच करने, मां-बच्चे में खतरे के लक्षण की पहचान करने आदि के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
इस मौके पर मौजूद आशा कार्यकर्ताओं को बीएनसी किट भी प्रदान किया गया। साथ ही साथ आशा कार्यकर्ताओं को जनसंख्या नियंत्रण के उपाय भी सुझाए गए ताकि देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित किया जा सके। इस मौके पर डा. अनिल त्रिपाठी, जेपी गौतम, बृजेंद्र कुमार सिंह सहित कई अन्य आशा कार्यकर्ता व आशा संगिनी मौजूद रहीं।