श्रावस्ती। प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढते मामलों से स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। संभावित खतरे को देखते हुए जिले में भी स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। साथ ही किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय में आइसोलेशन वार्ड स्थापित किया गया है।
टाइप-ए इन्फ्लूएंजा वायरस से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा बना रहता है। प्रदेश के कई जिलों में स्वाइन फ्लू के मरीज मिले हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग इससे निपटने के लिए तैयारियों में जुटा है। जिला चिकित्सालय भिनगा में एक आठ बेड के वार्ड को आइसोलेशन वार्ड में परिवर्तित कर दिया गया है। साथ ही उसमें सभी जरूरी दवाएं भी मुहैया करा दी गई हैं। सीएमएस डॉ. राजपाल सिंह ने बताया कि अब तक स्वाइन फ्लू का एक भी मरीज जिले में नहीं मिला है। हालांकि वायरल के मरीज अधिक आ रहे हैं।
यह हैं प्रमुख लक्षण
सीएमएस ने बताया कि स्वाइन फ्लू के संक्रमित मरीज को तेज बुखार और ठंड लगना, सूखी खांसी और गले में खराश या दर्द होना, सिरदर्द, मांसपेशियों और पूरे शरीर में तेज दर्द की समस्या होती है। साथ ही अत्यधिक थकान और कमजोरी, नाक बहना या बंद होना, बच्चों में उल्टी व दस्त की भी समस्या सामान्य है। वहीं, इसके गंभीर लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, होंठ व त्वचा का नीला पड़ना, लगातार चक्कर आना शामिल है। हालांकि यह समस्या अन्य बीमारियों में भी हो सकती है।
बचाव के उपाय -
हाथों को नियमित साबुन और पानी से धोएं या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करें। मास्क का प्रयोग करें, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें। बिना हाथ धोए अपनी आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। खांसते व छींकते समय मुंह और नाक को कपड़े से ढकें। सीएमएस ने बताया कि चिकित्सक की सलाह पर हर वर्ष इन्फ्लूएंजा (H1N1) की वैक्सीन लगवाएं। साथ ही खूब पानी पिएं, पौष्टिक आहार लें और लक्षण दिखने पर घर पर रहकर आराम करें तथा चिकित्सक से सलाह लें।
आइसोलेशन वार्ड में बने बेड