गिलौला। तराई क्षेत्र में भीषण गर्मी और उमस के बीच कई हैंडपंप खराब पड़े हैं। इससे राहगीरों और ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी हो रही है। शासन ने गर्मी को देखते हुए हैंडपंपों की मरम्मत का सख्त आदेश दिया था। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आदेश की अवहेलना कर रहे हैं। ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि बोर-रिबोर के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन हैंडपंपों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
जमीन में धंसा हैंडपंप, ग्रामीण बांध रहे गाय
कोटमुबारकपुर गांव में गुरुदयाल यादव के घर के पास का हैंडपंप सालों से खराब है। यह आधा जमीन में धंस चुका है और ग्रामीण इसका उपयोग गाय बांधने में कर रहे हैं।
टूट गया चबूतरा, कूड़े से पटा हैंडपंप
खड़खड़ापुरवा में संजय पांडेय के घर के पास का हैंडपंप भी टूटा है। यह कूड़े के ढेर से पटा है, जो वर्षों से खराब होने का संकेत है। राहगीर रामसमुझ, झोथू, निर्मल आदि ने बताया कि हैंडपंप पूरी तरह से निष्प्रयोज्य हो गया है और जिम्मेदार शिकायत के बाद भी सही नहीं करवा रहे हैं।
शिकायत के बाद भी नहीं दे रहे ध्यान
गिलौला के कोटमुबारकपुर गांव निवासी दीनानाथ विश्वकर्मा के घर के सामने लगा हैंडपंप भी महीनों से खराब है। ग्रामीण मोल्हे, सुबराती, मनोज आदि ने आरोप लगाते हुए बताया कि हैंडपंप कई घरों व राहगीरों के पानी का स्रोत है। हैंडपंप खराब होने की कई बार शिकायत की गई है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सभी सचिवों को अभियान चलाकर उनके क्षेत्र के खराब हैंडपंप सही करवाने का निर्देश है। अगर कहीं लापरवाही मिलती है और हैंडपंप खराब मिले तो संबंधित पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -वीरेंद्र प्रताप सिंह, बीडीओ