तराई में अप्रैल में मई जैसी तपन शुरू हो गई है। बुधवार को न्यूनतम 19 व अधिकतम 39 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। ऐसे में लोगों के सामने पेयजल का संकट भी गहरा रहा है। गांवों में लगे ज्यादातर हैंडपंप सूखे पड़े हुए हैं। हैंडपंपों को रिबोर तो कराया जाता है, लेकिन वह मात्र रस्म अदायगी ही साबित हो रहा है। रिबोर के बाद भी हैंडपंप लोगों की प्यास बुझाने में सक्षम नहीं हो रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रिबोर के बाद भी नहीं चला हैंडपंप
ग्राम पंचायत हरदत्तनगर गिरंट के मजरा काशीपुरवा में दाताराम के घर के सामने लगा हैंडपंप लगभग आठ माह पूर्व रिबोर कराया गया था। इसके बाद हैंडपंप मात्र एक माह चलकर खराब हो गया। ग्रामीणों ने कई बार हैंडपंप दुरुस्त कराने के लिए ग्राम प्रधान से कहा, लेकिन उसकी दोबारा मरम्मत नहीं कराई गई। साथ ही चबूतरे का निर्माण भी नहीं कराया गया।
एक वर्ष से खराब हैं हैंडपंप
ग्राम केवटन पुरवा में हनुमान के घर के सामने लगा हैंडपंप बीते एक वर्ष से खराब है। हैंडपंप लगने के बाद इसका दो बार रिबोर कराया जा चुका है। फिर भी हैंडपंप से लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। रिबोर कराने के बाद नल का चबूतरा भी नहीं बनवाया गया। ऐसे में लोगों को पेयजल के लिए कम बोर वाले हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है।
हैंडपंप का आधा हिस्सा हो गया गायब
ग्राम केवटन पुरवा में निब्बर के घर के पास लगा हैंडपंप लंबे अरसे से खराब है। ग्रामीणों की शिकायत पर ग्राम प्रधान ने हैंडपंप का आधा हिस्सा ठीक कराने के लिए खुलवा लिया। इसके बाद से न तो हैंडपंप ठीक हुआ और न ही लोगों को पेयजल ही मिल सका। ऐसे में लोगों को पेयजल के लिए छोटे नलों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
नहीं कराया गया चबूतरे का निर्माण
ग्राम केवटनपुरवा स्थित दुर्गा माता मंदिर पर लगा हैंडपंप दूषित पानी दे रहा है। साथ ही उसका आज तक चबूतरा भी नहीं बनवाया गया। ग्रामीण मंगल, जगेश्वर, सियाराम आदि ने बताया कि दूसरे हैंडपंप के टूटे चबूतरे को उठाकर यहां रखवा दिया गया है। हैंडपंप की मरम्मत व चबूतरा निर्माण के लिए कई बार जिम्मेदारों को कहा गया लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में मंदिर आने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।