श्रावस्ती। मंदिरों की सजावट का काम चरम पर है। शनिवार से मंदिर सहित घरों में कलश स्थापना के साथ देवी पूजा प्रारंभ होगी। इसके लिए सुबह छह बजे से कलश स्थापना का विशेष मुहूर्त है। इस बार देवी भक्तों को पूरे नौ दिन व्रत रहने का अवसर मिलेगा। इस दौरान कई दिव्य सहयोग भी आएंगे जिसमें श्रद्धालु अपनी अन्य इच्छाओं की पूर्ति कर सकेंगे। देवी पूजन के लिए पंडाल बनाने की भी तैयारी चल रही है।
पंडित शेरबहादुर तिवारी ने बताया कि नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश स्थापना करने से पहले मिट्टी की वेदी पर जौ बोएं, इसके बाद कलश की स्थापना करें, गंगा जल रखें। इस पर कुल देवी की प्रतिमा या फिर लाल कपड़े में लिपटे नारियल को रखें और पूजन करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि कलश की जगह पर नौ दिन तक अखंड दीप जलता रहे।
उन्होंने आगे बताया कि कलश स्थापना को घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना के साथ ही होती है। घट स्थापना अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है। इस बार प्रतिपदा रात 9:08 बजे तक रहेगी। इससे पूर्व सुबह 7:30 से नौ बजे तक, दोपहर डेढ़ से साढ़े चार बजे तक व शाम छह बजे से 7:30 बजे तक कर सकते हैं।