गंधकुटी में प्रार्थना करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को महाराष्ट्र से आए 40 अनुयायियों से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से जेतवन में पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि त्याग व तपस्या के बिना ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। भगवान बुद्ध ने भी ज्ञान की प्राप्ति के लिए अपने बिलासिता पूर्ण जीवन का त्याग किया था। सांसारिक मोह माया को छोड़कर वह भिक्षु बन गए और जंगल-जंगल भटके।
उन्होंने त्याग व तपस्या के दम पर ज्ञान की प्राप्ति की, जिससे पूरे विश्व को लाभ हुआ। उन्होंने जीवन में बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु के दुखों को देखा और उसके बाद सत्य की खोज शुरू की। बोधगया में पीपल (बोधि) वृक्ष के नीचे ध्यान करते हुए उन्होंने मन की प्रकृति को समझा और ज्ञान प्राप्त किया।