बोधि वृक्ष के नीचे बैठक कर पूजा करते अनुयायी। - संवाद
श्रावस्ती। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को वियतनाम से आए अनुयायियों के 100 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने अपने रीति-रिवाज से बोधि वृक्ष की पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध भिक्षु भंवरानंद की अध्यक्षता में बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा में भिक्षु भंवरानंद ने बताया कि जो व्यक्ति थोड़े में ही खुश रहता है, सबसे अधिक खुशी उसी के पास होती है। हमें किसी जंगली जानवर की अपेक्षा एक कपटी और दुष्ट मित्र से अधिक डरना चाहिए, क्योंकि जानवर बस शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन कपटी मित्र चरित्र व बुद्धि को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने आगे कहा कि मन और शरीर, दोनों को स्वस्थ रखने के लिए हमें अतीत पर शोक नहीं करना चाहिए, भविष्य की चिंता भी नहीं करनी चाहिए।