तपोस्थली में प्रार्थना करते अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली बुधवार को श्रीलंका व कंबोडिया से आए 84 अनुयायियों के दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में बोधि वृक्ष की पुष्प पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा में पुष्पों की महत्ता बताते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पुष्प का उच्च स्थान है। देवी-देवताओं की पूजा, भगवान की आरती, व्रत, उपवास व सभी पर्वों पर पुष्प चढ़ाए जाते हैं। अनुष्ठान, संस्कार, सामाजिक व पारिवारिक कार्य बिना पुष्प के अधूरे समझे जाते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि पुष्पों की सुगंध से देवता प्रसन्न होते हैं और सुंदरता के प्रतीक पुष्प हमारे जीवन में उल्लास, उमंग व प्रसन्नता लाते हैं। पुष्प श्रेष्ठ फल प्रदान करते हैं। कमल व पुंडरीक की माला को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है। पूजन के बाद अनुयायियों ने परिक्रमा की।