जेतवन परिसर में आनंद बोधि पर प्रार्थना करते अनुयायी। -संवाद
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए 65 अनुयायियों से गुलजार रही। सभी ने बुद्ध की प्रतिमा लेकर जेतवन का भ्रमण किया। इस दौरान अनुयायियों ने भिक्षु दीपा लोकमहाथेरो के नेतृत्व में आनंद बोधि पर प्रार्थना की।
बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु दीपा लोकमहाथेरो ने कहा कि एक बार भगवान बुद्ध जेतवन विहार में थे, तभी भिक्षु चक्षुपाल भगवान से मिलने के लिए आए। चक्षुपाल अंधे थे। एक दिन कुछ भिक्षुओं ने मरे हुए कीड़ों को चक्षुपाल की कुटी के बाहर पाया और चक्षुपाल की निंदा करनी शुरू कर दी।
इसके साथ ही उन पर प्राणियों की हत्या करने का आरोप लगाया। भगवान बुद्ध ने निंदा कर रहे उन भिक्षुओं को बुलाया और पूछा कि क्या तुमने भिक्षु को कीड़े मारते हुए देखा है। उन्होंने उत्तर दिया, नहीं। इस पर भगवान बुद्ध ने उन साधकों से कहा कि जैसे तुमने उन्हें कीड़ों को मारते हुए नहीं देखा, वैसे ही चक्षुपाल ने भी उन्हें मरते हुए नहीं देखा। ऐसे में उनकी भर्त्सना करना उचित नहीं है।