बोधि वृक्ष की पूजा करते बौद्ध अनुयायी। - संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 25 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु विमल तिस्स के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया। बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु ने शास्ता के ज्ञान-दर्शन पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने कहा कि कुछ शास्ता ऐसे होते हैं जिनका ज्ञान शुद्ध नहीं होता। इसके बावजूद वे स्वयं को शुद्ध, स्वच्छ और निर्मल ज्ञान वाला घोषित करते हैं। उनके श्रावक यह जानते हैं कि शास्ता का ज्ञान निर्मल नहीं है, फिर भी वे उसकी घोषणाओं का बचाव करते हैं। यदि यह बात गृहस्थों को बताई जाए तो यह उनके लिए उचित नहीं होगा। ऐसे शास्ता को चीवर, पिंडपात, शयनासन और ग्लान प्रत्यय-भैषज्य से सम्मान मिलता है।