तपोस्थली स्थित गंध कु़टी पर प्रार्थना करते अनुयायी। संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को अनुयायियों से गुलजार रही। तपोस्थली स्थित गंध कुटी पर श्रीलंका के बौद्ध अनुयायियों ने भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में प्रार्थना की।
भिक्षु दीपा लोक महाथेरो ने कहा कि बौद्ध काल में शिक्षा मनुष्य के सर्वांगीण विकास का साधन थी। इसका उद्देश्य मात्र पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं, अपितु मनुष्य के स्वास्थ्य का भी विकास करना था। बौद्ध युग में शिक्षा व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक उत्थान का सबसे प्रमुख माध्यम थी।
प्राचीन भारतीयों ने शिक्षा को आध्यात्मिक महत्व दिया किया है। भौतिक तथा आध्यात्मिक उत्थान व समाज के विभिन्न उत्तर-दायियों के निर्वाह में शिक्षा की महत्ता को स्वीकार किया गया है। वैदिक युग से ही इसे प्रकाश का स्रोत माना गया है। जो मानव के विभिन्न क्षेत्रों को आलोकित करते हुए सही दिशा-निर्देश देता है। इस दौरान काफी अनुयायी मौजूद रहे।