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तपोस्थली में जुटे श्रीलंका से आए अनुयायी

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गंध कुटि पर विशेष पूजा करते अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए अनुयायियों ने तपोस्थली में दीपालोक महोथरो के नेतृत्व में विशेष वर्षावास पूजा की। इसके बाद उन्होंने तपोस्थली का भ्रमण कर एतिहासिक जानकारी ली। इस दौरान धर्मगुरु ने बताया कि बुद्ध के आदेश पर बोधगया से बोधिवृक्ष की टहनी लगाकर श्रावस्ती के जेतवन में लगाई गई थी।
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वर्षावास पूजा के दौरान दीपालोक महाथेरो ने कहाकि भगवान बुद्ध श्रावस्ती छोड़कर दूसरी जगह न जाए ऐसा श्रावस्ती के लोगों को लगता था। आखिरकार उन्होंने श्रावस्ती छोड़ने का संकल्प लिया। इसकी जानकारी होने पर श्रावस्ती के लोग दुखी हो गए। उनकी याद सदा के लिए श्रावस्ती में रहे इसलिए बोधगया से बोधिवृक्ष की एक टहनी लाकर लगाने का अनुरोध किया।
लोगों की श्रद्धा को देखकर स्वयं भगवान बुद्ध ने बोधिवृक्ष की टहनी लाने के लिए आनंद को बोधगया भेजा। बोधगया जाकर आनंद वहां से बोधिवृक्ष की एक टहनी श्रावस्ती लाए। इसे बुद्ध के आदेशानुसार श्रावस्ती के जेतवन में स्थापित किया गया। इसे आज आनंद बोधिवृक्ष कहा जाता है।
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बाद में सम्राट अशोक ने संघमित्रा के साथ बहुत से भिक्षु व भिक्षुणियों को बोधगया से मूल बोधिवृक्ष की एक टहनी देकर उसे धम्म प्रचार करने के लिए श्रीलंका भेजा। संघमित्रा ने श्रीलंका की राजधानी अनुराधापूर में बोधिवृक्ष की टहनी को लगाया। इस दौरान अनुयायियों ने गंध कुटि में वर्षावास पूजा कर विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण किया। इस मौके पर धर्मपाल, नाग ज्योति, नागसागर, नागरत्न, माता विद्यावती सहित काफी संख्या में उपासक मौजूद रहे।
उधर, कटरा में जापान रेलवे बोर्ड के एक्सपर्ट का एक दल शुक्रवार को व रेलवे बोर्ड दिल्ली के कुछ लोगों के साथ बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। जहां टीम के सदस्यों ने श्रावस्ती का भ्रमण किया। इस दौरान आए दल में जापान के ऐसी दा, मि सीमा, यामामोतो शामिल रहे।
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